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क्या असदुद्दीन ओवैसी का सपना पूरा होगा? हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी प्रधानमंत्री?

हाल ही में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बीच एक बयान को लेकर तीखी बहस हुई है। ओवैसी ने हिजाब पहनने वाली महिला को प्रधानमंत्री बनने का सपना व्यक्त किया, जबकि सरमा ने भारत को एक हिंदू राष्ट्र बताया। इस विवाद ने संविधान, धर्म और राजनीति पर नई बहस को जन्म दिया है। ओवैसी ने सरमा की टिप्पणियों का कड़ा जवाब दिया, जिससे यह बहस केवल राजनीतिक सीमाओं तक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक स्तर पर भी फैल गई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
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क्या असदुद्दीन ओवैसी का सपना पूरा होगा? हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी प्रधानमंत्री?

नई दिल्ली में ओवैसी और सरमा के बीच बयानबाजी


नई दिल्ली: एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बीच एक बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब ओवैसी ने एक चुनावी सभा में हिजाब पहनने वाली महिला को भारत का प्रधानमंत्री बनने का सपना व्यक्त किया। इस बयान ने देश की राजनीति में संविधान, धर्म और नेतृत्व पर नई बहस को जन्म दिया।


ओवैसी का संविधान पर जोर

शनिवार को सोलापुर में एक जनसभा में ओवैसी ने भारतीय संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने पाकिस्तान के संविधान की तुलना करते हुए कहा कि वहां प्रधानमंत्री बनने के लिए धर्म की शर्त है, जबकि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या महापौर बन सकता है। ओवैसी ने कहा कि उनका सपना है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला इस देश की प्रधानमंत्री बने।


सरमा की प्रतिक्रिया

ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि संविधान में किसी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने का प्रावधान नहीं है, लेकिन भारत एक हिंदू राष्ट्र और हिंदू सभ्यता पर आधारित देश है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मानना है कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा हिंदू ही होगा। सरमा के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दिया।


ओवैसी का कड़ा जवाब

नागपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ओवैसी ने सरमा की टिप्पणी पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरमा संविधान की सही व्याख्या नहीं कर रहे हैं। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि प्रधानमंत्री किसी विशेष धर्म से होना चाहिए। उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर देता है और भारत किसी एक समुदाय का देश नहीं है।


समावेशिता बनाम संकीर्ण सोच

ओवैसी ने आगे कहा कि भारत की खूबसूरती उसकी विविधता में है और यह देश उन लोगों के लिए भी है जो ईश्वर में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं की सोच संकीर्ण है, जिससे वे संविधान की मूल भावना को समझने में असफल रहते हैं। इस बयान के साथ ही यह बहस केवल राजनीति तक सीमित न रहकर सामाजिक और वैचारिक स्तर पर भी पहुंच गई।


भाजपा की प्रतिक्रिया

इस विवाद में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी शामिल हो गए। उन्होंने ओवैसी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में समावेशिता में विश्वास रखते हैं, तो पहले किसी पसमांदा मुस्लिम या हिजाब पहनने वाली महिला को एआईएमआईएम का अध्यक्ष बनाकर दिखाएं। सोशल मीडिया पर उनका यह बयान तेजी से वायरल हुआ।


चुनावी माहौल में बयानबाजी

यह पूरा विवाद ऐसे समय पर सामने आया है, जब मुंबई में नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। इस बीच ओवैसी ने यूपीए सरकार के दौरान गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम में हुए संशोधनों पर भी सवाल उठाए और कांग्रेस पर विचाराधीन कैदियों के साथ अन्याय का आरोप लगाया।