क्या असदुद्दीन ओवैसी ने नवनीत राणा के बयान पर उठाए सवाल? जानें पूरी कहानी
राजनीतिक बयानबाजी का नया मोड़
देश में जनसंख्या को लेकर दिए गए एक बयान ने राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा की नवनीत राणा के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राणा ने सुझाव दिया था कि देश की जनसंख्यात्मक स्थिति पाकिस्तान जैसी न हो जाए, इसलिए हिंदुओं को तीन से चार बच्चे पैदा करने चाहिए। इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
ओवैसी का कटाक्ष
अकोला में एक रैली के दौरान, ओवैसी ने बिना नाम लिए राणा के बयान पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उनके खुद के छह बच्चे हैं और उनकी दाढ़ी भी अब सफेद हो रही है। ओवैसी ने यह सवाल उठाया कि अगर चार बच्चे पैदा करने की बात की जा रही है, तो फिर आठ या उससे अधिक बच्चे पैदा करने से कौन रोक रहा है। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि जब नेता इस तरह की सलाह दे रहे हैं, तो उन्हें पहले खुद इसका पालन करना चाहिए।
अन्य नेताओं के बयानों का संदर्भ
दूसरे नेताओं के बयानों का जिक्र
ओवैसी ने अपने भाषण में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के पुराने बयानों का भी उल्लेख किया, जिनमें अधिक बच्चे पैदा करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि सभी लोग ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन यह कोई समाधान नहीं है। ओवैसी ने चुनौती दी कि अगर यही सोच है, तो नेता खुद 20 बच्चे पैदा करके उदाहरण क्यों नहीं पेश करते। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना और मजाकिया सोच बताया।
नवनीत राणा के बयान से उपजा विवाद
नवनीत राणा के बयान से बढ़ा विवाद
नवनीत राणा ने पहले कहा था कि कुछ समुदायों में कई शादियां और अधिक बच्चे होने के कारण उनकी आबादी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे देश की जनसंख्या संरचना पर असर पड़ सकता है। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने हिंदुओं से अपील की थी कि वे देश की रक्षा के लिए कम से कम तीन से चार बच्चे पैदा करें।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस की भी कड़ी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या जैसे गंभीर विषय पर बात करते समय वैज्ञानिक और व्यावहारिक सोच अपनाई जानी चाहिए। टैगोर ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा की ओर से ऐसे बयान समाज में भ्रम फैलाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही जनसंख्या दबाव का सामना कर रहा है और जिन राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण नहीं हो पाया है, वहां हालात और मुश्किल होते जा रहे हैं।
