क्या कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भारत को वेनेजुएला से जोड़ा? जानें विवाद की पूरी कहानी
राजनीतिक विवाद का नया मोड़
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के हालिया बयान ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वेनेजुएला के संकट का उल्लेख करते हुए एक ऐसा सवाल उठाया है, जिस पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनके बयान को भारत की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय छवि से जोड़ा जा रहा है, जिससे राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
टैरिफ पर विवादास्पद टिप्पणी
चव्हाण ने ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ट्रंप ने व्यापार को दबाव बनाने का एक साधन बना लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दे, तो भी भारत की स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। इसी संदर्भ में उन्होंने एक विवादास्पद सवाल उठाया कि क्या ट्रंप भविष्य में भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ भी वही कदम उठा सकते हैं, जैसा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति के साथ हुआ था।
बीजेपी का तीखा जवाब
चव्हाण द्वारा भारत की तुलना वेनेजुएला से करने पर बीजेपी ने कड़ा विरोध किया। बीजेपी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर चव्हाण के बयान का वीडियो साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता भारत को कमजोर और अस्थिर देश के रूप में पेश कर रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि इस तरह की तुलना कांग्रेस की भारत-विरोधी मानसिकता को उजागर करती है और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाती है।
CONGRESS SINKS TO NEW LOW EVERYDAY :
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) January 6, 2026
Congress leader Prithviraj Chavan SHAMELESSLY comparing India’s situation with Venezuela.
By asking whether “what happened in Venezuela can happen in India”, Congress is making its ANTI INDIA MINDSET clear.
Rahul Gandhi wants CHAOS IN… pic.twitter.com/P5Qm4GKZA4
संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर टिप्पणी
एक अन्य साक्षात्कार में, चव्हाण ने कहा कि वेनेजुएला में जो कुछ हुआ, वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आज वेनेजुएला में ऐसा हो सकता है, तो कल किसी अन्य देश, यहां तक कि भारत में भी ऐसी स्थिति बन सकती है।
भारत की विदेश नीति पर सवाल
चव्हाण ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत बड़े वैश्विक संकटों पर स्पष्ट रुख अपनाने से बचता रहा है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और वेनेजुएला मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत हर बार संतुलन साधने की कोशिश करता है, लेकिन खुलकर किसी पक्ष में नहीं बोलता।
मादुरो पर आरोपों को राजनीतिक बताया
चव्हाण ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर अमेरिका द्वारा लगाए गए मादक पदार्थ तस्करी के आरोपों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं हैं और यह मामला राजनीतिक दबाव का हिस्सा हो सकता है।
भारत की चुप्पी पर सवाल
चव्हाण ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कुछ हिस्सों द्वारा अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल संतुलन बनाए रखने से भारत अपनी वैश्विक भूमिका निभा पाएगा।
