क्या जेल में रहकर भी चल सकती है सरकार? JPC की बैठक में उठे गंभीर सवाल
संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में चर्चा
नई दिल्ली: 7 जनवरी को आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक ने एक बार फिर जेल में बंद जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। यह जेपीसी की तीसरी बैठक थी, जिसमें उन विधेयकों पर गहन चर्चा की गई, जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों की जेल में रहने की स्थिति में उनके पद पर बने रहने से संबंधित हैं।
करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में समिति ने तीन महत्वपूर्ण विधेयकों - 130वां संविधान संशोधन विधेयक 2025, जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 पर विचार किया। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि क्या कोई निर्वाचित नेता लंबे समय तक हिरासत में रहकर शासन कर सकता है।
क्या जेल से चल सकती है सरकार?
बैठक के बाद जेपीसी की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि कुछ राजनीतिक दलों को चर्चा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसमें भाग लेने से मना कर दिया। उन्होंने इस रवैये को बेहद चौंकाने वाला बताया।
अपराजिता सारंगी ने कहा, "मोदी सरकार कानून के दायरे में रहकर शासन करना चाहती है, जबकि कुछ दल कानून से बाहर रहकर सरकार चलाने की सोच रखते हैं। जेल से सरकार चलाना लोकतंत्र के लिए अत्यंत अपमानजनक है।"
विपक्ष की मांग
संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के दौरान विपक्ष के एक सांसद ने यह मांग की कि इन विधेयकों पर चर्चा के लिए विपक्षी दलों को भी अपने विचार और सुझाव रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
अमित शाह द्वारा पेश विधेयक
इन तीनों विधेयकों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त 2025 में लोकसभा में पेश किया था। प्रस्तावित कानून के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी केंद्रीय या राज्य मंत्री को गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया जाता है और वह लगातार 30 दिनों तक जेल में रहते हैं, तो उन्हें 31वें दिन अपने पद से इस्तीफा देना होगा। विधेयकों में यह भी प्रावधान है कि यदि संबंधित मंत्री इस्तीफा नहीं देता है, तो उसे स्वतः ही पद से हटा हुआ माना जाएगा।
