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क्या नेहरू ने भारत की सुरक्षा से किया समझौता? बीजेपी का गंभीर आरोप

भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने देश की सुरक्षा से समझौता किया। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहरू के कार्यकाल के दौरान सीआईए और केजीबी के एजेंटों की मौजूदगी का जिक्र किया। इसके अलावा, नेहरू द्वारा तिब्बत को चीन को सौंपने और बेरूबाड़ी पाकिस्तान को देने के मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए। क्या नेहरू ने इन समझौतों के पीछे कोई छिपा कारण था? जानें पूरी कहानी।
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क्या नेहरू ने भारत की सुरक्षा से किया समझौता? बीजेपी का गंभीर आरोप

बीजेपी का नेहरू पर तीखा हमला


भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने नेहरू को समझौतावादी करार देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया। बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नेहरू का व्यवहार हमेशा ब्रिटिशों की तरह रहा और उन्होंने जानबूझकर गलतियां कीं, जिससे भारत कमजोर हुआ।


नेहरू के कार्यालय में विदेशी एजेंटों की मौजूदगी

पात्रा ने नेहरू के कार्यकाल के दौरान सीआईए और केजीबी के एजेंटों की सक्रियता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नेहरू के सचिवालय में सीआईए की इतनी मजबूत उपस्थिति थी कि उनके विशेष सहायक एमओ मथाई को अमेरिकी एजेंट माना जाता था। इसके अलावा, 1960 और 1970 के दशक में केजीबी के एजेंट भी उनके कार्यालय में मौजूद थे।


पंचशील समझौते और तिब्बत का मुद्दा

बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि नेहरू ने पंचशील समझौते के तहत तिब्बत को चीन को उपहार में दे दिया। उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस ब्यूरो ने नेहरू को अक्साई चिन में चीन द्वारा सड़क बनाने की जानकारी दी थी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। 1962 के भारत-चीन युद्ध में हार के लिए भी नेहरू को जिम्मेदार ठहराया गया।


बेरूबाड़ी का विवाद

पात्रा ने यह भी कहा कि नेहरू ने पश्चिम बंगाल सरकार को सूचित किए बिना बेरूबाड़ी को पाकिस्तान को सौंप दिया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद, नेहरू ने इसे नौवें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से पाकिस्तान को दे दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नेहरू को चीन और पाकिस्तान से रिश्वत मिली थी, जिससे उन्होंने भारत की भूमि इन देशों को दी।