क्या प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों पर की आपत्तिजनक टिप्पणियां? कांग्रेस ने दायर किया विशेषाधिकार नोटिस
कांग्रेस का विशेषाधिकार नोटिस
नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विशेषाधिकार नोटिस पेश किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने राष्ट्र के संबोधन में सांसदों के खिलाफ अनुचित टिप्पणियां कीं। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने यह नोटिस लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा है।
विधेयक की हार के बाद का संबोधन
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 को अस्वीकृत कर दिया गया। यह विधेयक महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटों की संख्या 816 करने का प्रस्ताव रखता था। इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जो प्राप्त नहीं हो सकी।
18 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने 29 मिनट का एक राष्ट्र के नाम संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों पर विधेयक को रोकने का आरोप लगाया और उनके वोटिंग पैटर्न पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि इस संबोधन में सांसदों के इरादों पर संदेह किया गया।
केसी वेणुगोपाल ने स्पीकर को लिखे पत्र में कहा, “मैं लोकसभा की प्रक्रिया और आचरण नियमों के तहत प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार का प्रश्न उठाते हुए नोटिस दे रहा हूं। उन्होंने 18 अप्रैल को अपने भाषण में लोकसभा सदस्यों पर अस्पष्ट आरोप लगाए।”
My senior colleague in the Lok Sabha, KC Venugopal, has issued a notice of question of privilege against the Prime Minister for his so-called address to the nation following the defeat of his nefarious designs in the Lok Sabha by something he did not expect—absolute Opposition… pic.twitter.com/ZbGDaphZiQ
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 21, 2026
संसद की गरिमा पर सवाल
वेणुगोपाल ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों के कार्यों पर सवाल उठाना व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि यह संसद की गरिमा और लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने स्पीकर से तुरंत कार्रवाई करने और संसद की पवित्रता बनाए रखने की अपील की, ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, “मेरे वरिष्ठ सहयोगी केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस जारी किया है। यह संबोधन राष्ट्रीय एकता के लिए होना चाहिए था, लेकिन इसमें कांग्रेस पर 59 हमले हुए। यह प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर एक और दाग है।”
विधेयक का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि यह विधेयक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और लोकसभा को अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक है, लेकिन विपक्ष ने इसे संविधान के खिलाफ और राजनीतिक उद्देश्य से लाया गया बताया। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर विधेयक को अस्वीकृत किया।
कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन पक्षपातपूर्ण था और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन करता है। अब यह देखना होगा कि स्पीकर इस नोटिस पर क्या निर्णय लेते हैं।
