क्या प्रियंका गांधी असम में कांग्रेस की किस्मत बदल पाएंगी?
कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को असम की चुनावी जिम्मेदारी सौंपी
नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी को तेज करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा को असम के लिए चुनावी स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। असम में चुनाव तीन महीने बाद होने वाले हैं, और प्रियंका की यह भूमिका कांग्रेस की रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
असम का चुनाव 2026 के लिए महत्वपूर्ण
असम उन राज्यों में से एक है, जहां 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में भी चुनाव होने हैं। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके प्रमुख दल हैं। ऐसे में असम कांग्रेस के लिए एक ऐसा राज्य है, जहां वह भाजपा को चुनौती दे सकती है।
कांग्रेस के लिए असम चुनाव का महत्व
भाजपा 2016 से असम में सत्ता में है, और कांग्रेस लंबे समय से राज्य में वापसी की कोशिश कर रही है। इस बार, पार्टी अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। कांग्रेस का मानना है कि एकजुट विपक्ष ही भाजपा को सत्ता से बाहर कर सकता है।
गौरव गोगोई का नेतृत्व
असम में कांग्रेस का नेतृत्व पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई कर रहे हैं। वह न केवल राज्य में पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं, बल्कि 2024 में लोकसभा में राहुल गांधी के बाद विपक्ष के उपनेता की भूमिका भी निभा रहे हैं। युवा और आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाने वाले गौरव गोगोई को कांग्रेस असम में अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती है।
प्रियंका गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका
प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने गांधी परिवार के किसी सदस्य को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर बैठाया है। उनकी जिम्मेदारी उम्मीदवारों के चयन, टिकट वितरण और छोटे दलों के साथ गठबंधन को अंतिम रूप देने की होगी। उनकी उपस्थिति से कांग्रेस को संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
टीम में शामिल प्रमुख सदस्य
प्रियंका गांधी की टीम में उनके करीबी सहयोगी इमरान मसूद और सप्तगिरि शंकर उलका शामिल हैं, जो दोनों लोकसभा सांसद हैं। इसके अलावा सिरिवेल्ला प्रसाद भी स्क्रीनिंग कमेटी का हिस्सा होंगे। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि यह टीम जमीनी स्तर पर बेहतर रणनीति तैयार करेगी।
प्रियंका के सामने चुनौतियाँ
हालांकि यह जिम्मेदारी बड़ी है, लेकिन चुनौती भी कम नहीं है। 2019 में सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद प्रियंका गांधी को 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा था, जब कांग्रेस केवल दो सीटें जीत पाई थी। लेकिन हाल के महीनों में उन्होंने भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है।
भाजपा का जवाब
असम में मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस गठबंधन को 50 सीटें मिली थीं। दोनों के वोट शेयर में अंतर मात्र 1.6 प्रतिशत था। इस बार भाजपा ने गौरव गोगोई पर व्यक्तिगत हमले तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा लगाए गए आरोपों को गोगोई परिवार ने खारिज किया है।
क्या प्रियंका गांधी समीकरण बदल पाएंगी?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या प्रियंका गांधी की रणनीति और नेतृत्व कांग्रेस को असम में नई ताकत दिला पाएगा। आने वाले महीनों में असम की राजनीति और भी गर्म होने की संभावना है।
