क्या राहुल गांधी के बेतुके बयान से कांग्रेस को होगा नुकसान? जानिए बीजेपी की प्रतिक्रिया
राजनीति में बयानबाजी का दौर
नई दिल्ली: वर्तमान में देश की राजनीति में बयान देने की होड़ मची हुई है। कुछ नेता पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि पर सरकार को गिराने की बात कर रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि अगले साल सरकार का पतन निश्चित है। यह सवाल उठता है कि राहुल गांधी और अन्य प्रमुख नेता इस तरह के बेतुके बयान क्यों दे रहे हैं, जबकि उन्हें यह अच्छी तरह से पता है कि मौजूदा सरकार, जो अंगद की तरह स्थिर है, को गिराना तो दूर, हिलाना भी मुश्किल है।
बीजेपी का राहुल गांधी पर जवाब
यदि बीजेपी को किसी नेता के बेतुके बयानों से चुनावी लाभ होता है, तो वह राहुल गांधी के बयान हैं। जब भी राहुल सरकार पर हमला करते हैं, उन्हें या तो मुंह की खानी पड़ती है या फिर विदेश में जाकर विपश्यना में लीन हो जाते हैं। बीजेपी ने एक बार फिर राहुल पर निशाना साधा है, यह कहते हुए कि उनका बयान न केवल निराधार है, बल्कि राजनीतिक निराशा का प्रतीक भी है। राहुल गांधी के बयानों की विडंबना यह है कि जब उनकी बातों की जांच होती है, तो उनका प्रभाव नगण्य साबित होता है।
क्यों है कांग्रेस की स्थिति कमजोर?
2014 के बाद हर चुनाव में कांग्रेस यह दावा करती है कि वह मजबूती से चुनाव लड़ रही है, लेकिन जब परिणाम सामने आते हैं, तो पता चलता है कि कई कांग्रेसी नेताओं की जमानत जब्त हो जाती है और पार्टी हाशिए पर चली जाती है। राहुल के बयानों का भी यही हाल होता है; वे जब बयान देते हैं, तो ऐसा लगता है कि राजनीति का केंद्र वही हैं, लेकिन असलियत में वे खुद ही लापता हो जाते हैं। वर्तमान में, एनडीए मजबूत स्थिति में है, और बीजेपी के पास भले ही पहले जैसा आंकड़ा न हो, लेकिन गठबंधन के साथ सरकार पूरी तरह से स्थिर है।
क्या राहुल गांधी चिंतित हैं?
राहुल गांधी और उनके परिवार पर पार्टी के भीतर हो रहे हमलों और उनकी रणनीतियों की विफलता से वे चिंतित हैं। यही कारण है कि वे ऐसे बेतुके बयान देकर अपने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कार्यकर्ता जानते हैं कि यह सब केवल दिखावा है। कांग्रेस का अस्तित्व हर चुनाव में संकट में है। राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की लोकप्रियता से भी चिंतित हैं। जब भी उन्होंने पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले किए हैं, उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने जीत हासिल कर यह साबित कर दिया है कि इन बयानों का चुनावी मैदान में कोई असर नहीं है। राहुल गांधी इस समय केवल हेडलाइन्स मैनेजमेंट में लगे हुए हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
