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क्या लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल होगा? जानें पूरी कहानी

संसद का बजट सत्र अब अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष ने इस प्रस्ताव का नोटिस पहले ही दे दिया है, जिसमें 118 सांसदों के हस्ताक्षर शामिल हैं। क्या विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या है कि वह इस प्रस्ताव को सफल बना सके? जानें इस प्रस्ताव की प्रक्रिया, इतिहास और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य के बारे में।
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क्या लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल होगा? जानें पूरी कहानी

नई दिल्ली में अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा


नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र अब अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष ने पहले चरण में ही इस प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिसमें 118 सांसदों के हस्ताक्षर शामिल हैं।


शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, लेकिन अब पार्टी ने यह स्पष्ट किया है कि वह इस अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी। फिर भी, संसद में मौजूदा संख्या संतुलन को देखते हुए विपक्ष की स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।


अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कुछ नियम निर्धारित हैं। इसके लिए कम से कम दो सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं और प्रस्ताव देने से पहले 14 दिन का नोटिस देना होता है। इसके अलावा, सदन में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना भी जरूरी है।


इस प्रस्ताव के लिए कांग्रेस के तीन सांसदों ने नोटिस दिया है, जिसमें मोहम्मद जावेद, कोडिकुनिल सुरेश और मल्लू रवि शामिल हैं। विपक्ष के 118 सांसदों के हस्ताक्षर भी इस प्रस्ताव के समर्थन में बताए जा रहे हैं।


नोटिस में यह आरोप लगाया गया है कि सदन में नेता प्रतिपक्ष और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। इसके साथ ही, आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किया गया है।


प्रक्रिया के बाद की स्थिति

यदि यह नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है, तो इसके बाद बहस के लिए समय निर्धारित किया जाएगा और लोकसभा में इस विषय पर चर्चा होगी। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष अपनी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे।


नियमों के अनुसार, सदन की कार्यवाही का संचालन उपाध्यक्ष करते हैं, लेकिन वर्तमान में उपाध्यक्ष का पद खाली है। ऐसे में सभापति के पैनल में शामिल सबसे वरिष्ठ सांसद कार्यवाही का संचालन करेंगे। इस स्थिति में जगदंबिका पाल अध्यक्ष की कुर्सी संभाल सकते हैं।


संसद के इतिहास में अविश्वास प्रस्ताव

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का यह पहला अवसर नहीं है। संसद के इतिहास में पहली बार 1954 में लोकसभा अध्यक्ष जीवी मावलंकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। उस समय विपक्ष का नेतृत्व जेबी कृपलानी कर रहे थे।


इसके बाद 1966 में लोकसभा अध्यक्ष हुकुम सिंह के खिलाफ मधु लिमये ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। 1987 में भी लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था, जो अंततः पारित नहीं हो सका।


राज्यसभा में भी अविश्वास प्रस्ताव

हाल के वर्षों में राज्यसभा में भी ऐसा मामला सामने आया था। दिसंबर 2024 में राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था, जिसे उपसभापति हरिवंश ने नामंजूर कर दिया था।


क्या विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विपक्ष के पास इतना संख्या बल है कि वह लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटा सके। इसके लिए साधारण बहुमत यानी 272 सांसदों का समर्थन आवश्यक है।


वर्तमान लोकसभा में सरकार के पक्ष में 293 सांसदों का समर्थन है, जिसमें बीजेपी के 240, जेडीयू के 16 और अन्य दलों के सांसद शामिल हैं। वहीं, विपक्ष में कांग्रेस के 99 सांसदों के अलावा अन्य दलों के मिलाकर कुल 238 सांसद हैं। ऐसे में यदि मतदान की स्थिति आती है, तो लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के गिरने की संभावना है।