गंगा जल बंटवारे पर भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई दिशा
गंगा जल समझौते का महत्व
नई दिल्ली। बांग्लादेश और भारत के बीच संबंधों की नींव एक बार फिर गंगा जल पर निर्भर करती नजर आ रही है। ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम में बांग्लादेश की सत्तारूढ़ पार्टी BNP के महासचिव और ग्रामीण विकास मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ अच्छे संबंधों का भविष्य अब गंगा जल बंटवारे के समझौते पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही गंगा जल साझा करने की संधि को बांग्लादेश की “उम्मीदों और आवश्यकताओं” के अनुसार पुनः तैयार किया जाना चाहिए। आलमगीर ने भारत को एक स्पष्ट संदेश दिया कि नई संधि पर बातचीत जल्द शुरू होनी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक नया समझौता नहीं होता, तब तक पुरानी संधि को जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में जल बंटवारे के समझौतों को किसी निश्चित समय सीमा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
गंगा, जो भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद पद्मा के नाम से जानी जाती है, कृषि, पीने के पानी, मछली पालन और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। बांग्लादेश का आरोप है कि फरक्का बैराज के कारण सूखे मौसम में जल प्रवाह कम हो जाता है, जिससे कई क्षेत्रों में खारापन बढ़ता है और कृषि को नुकसान होता है।
हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर एक बड़े बैराज परियोजना को मंजूरी दी है, जो 2033 तक पूरा होने की उम्मीद है। ढाका का कहना है कि इसका उद्देश्य फरक्का बैराज के “नकारात्मक प्रभाव” को कम करना है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे नदी में गाद जमा होने और जल स्तर बढ़ने की समस्या और गंभीर हो सकती है।
इससे पहले, BNP नेताओं ने तीस्ता जल समझौते को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी की सरकार के कारण भारत-बांग्लादेश के बीच तीस्ता समझौता अटका हुआ है। साथ ही, उन्होंने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई थी कि इससे तीस्ता वार्ता आगे बढ़ सकती है। भारत की ओर से कहा गया है कि दोनों देशों के बीच जल विवादों को सुलझाने के लिए पहले से कई द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और बांग्लादेश 54 साझा नदियों से जुड़े मुद्दों पर नियमित बातचीत करते रहते हैं, लेकिन जिस तरह से BNP सरकार ने गंगा समझौते को सीधे रिश्तों से जोड़ा है, उससे आने वाले महीनों में जल राजनीति दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
