गणतंत्र दिवस की तैयारियों के चलते दिल्ली का हवाई क्षेत्र बंद, यात्रियों को होगी परेशानी
दिल्ली में हवाई क्षेत्र का आंशिक बंद
सर्दियों में कोहरे ने पहले ही हवाई यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, और अब गणतंत्र दिवस की तैयारियों ने स्थिति को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सुरक्षा कारणों से, सरकार ने 21 जनवरी से दिल्ली के हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। इसका सीधा असर हजारों उड़ानों और यात्रियों पर पड़ेगा।
हवाई क्षेत्र बंद होने का समय
सरकार द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, 21 जनवरी से अगले छह दिनों तक, हर दिन सुबह 10:20 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक दिल्ली का हवाई क्षेत्र बंद रहेगा। इस दौरान लगभग 2 घंटे 25 मिनट तक विमानों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी जाएगी।
उड़ानों पर प्रभाव
विमानन विश्लेषण कंपनी सिरियम के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 600 से अधिक उड़ानें प्रभावित होंगी। यह समय दिल्ली एयरपोर्ट के लिए अत्यधिक व्यस्त माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान यात्री यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ते हैं।
उड़ानों के रद्द होने, समय में बदलाव और कनेक्शन छूटने के कारण हजारों यात्रियों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। एयरलाइंस के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण होगी, क्योंकि उन्हें बड़ी संख्या में यात्रियों को संभालना होगा।
हवाई क्षेत्र बंद करने का कारण
गणतंत्र दिवस की रिहर्सल, अभ्यास और 26 जनवरी की मुख्य परेड के चलते दिल्ली का हवाई क्षेत्र बंद किया जा रहा है। इस दौरान कर्तव्य पथ पर परेड, वायुसेना का फ्लाईपास्ट और सैन्य व सांस्कृतिक प्रदर्शन होते हैं। इन कार्यक्रमों के दौरान विमानों और वीवीआईपी मूवमेंट की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी उड़ानें रद्द होंगी। कई उड़ानों के समय में बदलाव किया जा सकता है या यात्रियों को दूसरी फ्लाइट में शिफ्ट किया जा सकता है। लेकिन कोहरे और कम दृश्यता के कारण सीमित समय में इतनी उड़ानों को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
एयरलाइंस और एयरपोर्ट की चुनौतियाँ
एयरलाइंस को आधिकारिक नोटिस मिलने के बाद ही उड़ानों में बदलाव करना होता है। ऐसे में उन्हें देशभर के एयरपोर्ट्स के साथ तालमेल बिठाकर शेड्यूल में बदलाव करना, यात्रियों को सूचित करना और अनियमित संचालन से निपटना पड़ता है।
मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट पहले से ही अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं, वहीं दिल्ली एयरपोर्ट भी लगभग अपनी सीमा पर है। ऐसे में बंदी से पहले और बाद की उड़ानों को समायोजित करने की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। इसका असर उन उड़ानों पर भी पड़ सकता है जो न तो दिल्ली से शुरू होती हैं और न ही वहीं खत्म होती हैं।
