गुजरात सरकार की नई पहल पर उठे सवाल, प्रेम विवाह में परिवार की सहमति अनिवार्य
गुजरात सरकार की विवादास्पद पहल
गुजरात की सरकार ने एक नई योजना की घोषणा की है, जो व्यापक आलोचना का कारण बन रही है। यह पहल उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष सांघवी द्वारा की गई है, जो कि मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की कट्टरपंथी नीतियों की याद दिलाती है। उनके मंत्रालय ने प्रस्तावित किया है कि प्रेम विवाह के मामलों में लड़के और लड़की के परिवारों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि यदि कोई युवक या युवती प्रेम विवाह के लिए आवेदन करते हैं, तो उनके परिवार को इसकी सूचना दी जाएगी और उनकी सहमति प्राप्त की जाएगी।
यहां सवाल उठता है कि यदि युवाओं को अपने माता-पिता या परिवार की सहमति से शादी करनी होती, तो वे अदालत में आवेदन क्यों करते? जब दो वयस्क लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेना चाहते हैं, तो सरकार को इस तरह हस्तक्षेप करने का क्या अधिकार है? यह एक तरह से समय के चक्र को उलटने जैसा है। भाजपा के समर्थकों में भी इस पहल को लेकर असंतोष है, और राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्रों में इसकी आलोचना की जा रही है। कई लोगों का कहना है कि गुजरात अब एक आधुनिक और विविधतापूर्ण राज्य बन चुका है, जहां नए शहर विकसित हो रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने प्रोजेक्ट शुरू कर रही हैं। ऐसे में इस तरह की नीतियों से राज्य की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
