ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की मांग तेज
ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र में शामिल करने की नई पहल
नई दिल्ली: अमेरिका में ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र में शामिल करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने सोमवार को सदन में एक विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से डेनमार्क के इस स्वायत्त क्षेत्र को अमेरिका के अधीन लाने की इच्छा व्यक्त की थी।
विधेयक का उद्देश्य और सुरक्षा पहलू
रैंडी फाइन द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक में राष्ट्रपति ट्रंप को ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। फाइन ने कहा कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति है।
उनका कहना है, "ग्रीनलैंड केवल एक दूरस्थ चौकी नहीं है, जिसे नजरअंदाज किया जा सके। जो ग्रीनलैंड पर नियंत्रण रखता है, वही प्रमुख आर्कटिक शिपिंग मार्गों और सुरक्षा ढांचे पर भी नियंत्रण रखता है। अमेरिका को भविष्य में ऐसे शासन के हाथों में नहीं छोड़ना चाहिए, जो हमारे मूल्यों और सुरक्षा को कमजोर करना चाहते हैं।"
डेनमार्क और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ
ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क एक प्रमुख नाटो सहयोगी है। ट्रंप प्रशासन के इस रुख के बीच अमेरिका और डेनमार्क के रिश्तों में तनाव की संभावना को देखते हुए, इस सप्ताह अमेरिकी सांसदों का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल कोपेनहेगन जाने वाला है।
इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच एकता प्रदर्शित करना और कूटनीतिक संवाद को बनाए रखना है, ताकि ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते राजनीतिक बयानों के बीच आपसी विश्वास कम न हो।
ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व
आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ पिघलने के कारण नए समुद्री व्यापार मार्ग खुल रहे हैं। ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे इन मार्गों पर नियंत्रण पाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में खनिज संसाधनों और प्राकृतिक गैस के भंडार होने का अनुमान है, जिस पर अमेरिका अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।
हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की स्थानीय सरकारें पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि "ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है।" इस नए विधेयक के पेश होने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
किसी विदेशी क्षेत्र को अमेरिकी राज्य बनाना एक जटिल कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया है। इसके लिए न केवल अमेरिकी संसद की मंजूरी आवश्यक होगी, बल्कि डेनमार्क की सहमति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन भी अनिवार्य होगा। फिलहाल यह विधेयक प्रारंभिक चरण में है और इसे पारित होने के लिए भारी राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी।
