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चाबहार पोर्ट: भारत-ईरान संबंधों में नई चुनौतियाँ

भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट की दोस्ती अब विवाद का कारण बनती दिख रही है। भारत ने इस साल के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। ईरान के विदेश मंत्री ने इस स्थिति पर निराशा व्यक्त की है और चाबहार के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया है। जानें इस मुद्दे के पीछे की रणनीतिक अहमियत और दोनों देशों के बीच की जटिलताएँ।
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चाबहार पोर्ट: भारत-ईरान संबंधों में नई चुनौतियाँ

चाबहार पोर्ट का महत्व

भारत और ईरान के बीच मित्रता की एक प्रमुख वजह चाबहार पोर्ट है, जिसका विकास दोनों देशों ने मिलकर किया है। हालाँकि, अब यह पोर्ट विवाद का कारण बनता दिख रहा है, क्योंकि भारत ने इस वर्ष के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया है। इसका मतलब है कि भारत ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए वित्तीय सहायता नहीं दी है। चाबहार पोर्ट की रणनीतिक अहमियत इसलिए है क्योंकि यह हिंद महासागर को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है। इसके माध्यम से भारत पाकिस्तान को बाईपास करते हुए ईरान और अफगानिस्तान तक पहुँच बना सकता है।


अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए लगातार प्रतिबंधों के कारण भारत चाबहार परियोजना के प्रति सतर्कता दिखा रहा है। जब ईरान के विदेश मंत्री से इस विषय पर सवाल किया गया, तो उन्होंने निराशा व्यक्त की। उनका कहना था कि यह स्थिति दोनों देशों के लिए निराशाजनक है। उन्होंने चाबहार को एक महत्वपूर्ण बंदरगाह बताया और इसके पूर्ण विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे भारत को मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने में मदद मिलेगी।


भारत-ईरान संबंधों की मजबूती

ईरानी विदेश मंत्री ने इस इंटरव्यू में भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंधों का उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के बीच आत्मीयता है। हालाँकि, उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया, जो दर्शाता है कि ईरान को भारत से कई उम्मीदें हैं।