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चार राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान, उपचुनाव भी होंगे

चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावों की तारीखों की घोषणा की है। उपचुनाव दो चरणों में होंगे, जिसमें बारामती विधानसभा सीट पर सुनेत्रा पवार की संभावित उम्मीदवारी चर्चा का विषय है। जानें और क्या-क्या महत्वपूर्ण जानकारी है इस चुनावी प्रक्रिया में।
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चार राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान, उपचुनाव भी होंगे

चुनाव आयोग का ऐलान


नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावों की तारीखों की घोषणा की है। आयोग के अनुसार, इन राज्यों में मतदान अप्रैल में होगा। इसके साथ ही, छह राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने का निर्णय लिया गया है।


उपचुनाव की प्रक्रिया

चुनाव आयोग ने बताया कि उपचुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जिसमें गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की एक-एक विधानसभा सीट पर वोटिंग होगी। दूसरे चरण में 23 अप्रैल को मतदान होगा, जिसमें महाराष्ट्र और गुजरात की दो-दो सीटों पर उपचुनाव होंगे।


बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव

महाराष्ट्र की प्रमुख बारामती विधानसभा सीट पर भी 23 अप्रैल को मतदान होगा। यह सीट पहले अजित पवार के पास थी। जानकारी के अनुसार, उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली सुनेत्रा पवार इस सीट से चुनावी मैदान में उतर सकती हैं। वह एनसीपी विधायक दल की अध्यक्ष भी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी जीत की संभावना इस सीट पर काफी मजबूत है।


मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को चुनाव होंगे और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे, और परिणाम भी 4 मई को आएंगे। तमिलनाडु में भी 23 अप्रैल को चुनाव होगा और नतीजे 4 मई को आएंगे।


इस प्रकार, सभी पांच राज्यों के परिणाम 4 मई को ही घोषित किए जाएंगे। पश्चिम बंगाल सरकार की मांग के अनुसार, इस बार चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। ममता सरकार ने अनुरोध किया था कि चुनाव कम चरणों में किए जाएं, जबकि पिछली बार यहां 8 चरणों में चुनाव हुए थे।


चुनाव आयोग के कदम

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आयोग ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत प्रत्येक योग्य मतदाता को मतदाता सूची में बनाए रखने और अपात्र मतदाता को सूची से बाहर करने का प्रयास किया गया है।