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चुनाव आयोग की नई प्रक्रिया पर ऐडमिरल अरुण प्रकाश की चिंता: क्या है समस्या?

पूर्व नौसेना प्रमुख ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को फॉर्म भरने के बावजूद पहचान साबित करने के लिए दफ्तर बुलाया गया। इस प्रक्रिया के तहत कई रिटायर्ड अधिकारियों को भी समान समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को साफ करने के लिए है, लेकिन बुजुर्गों के लिए यह कठिनाई का कारण बन रही है। जानें पूरी कहानी में क्या है।
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चुनाव आयोग की नई प्रक्रिया पर ऐडमिरल अरुण प्रकाश की चिंता: क्या है समस्या?

चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया


नई दिल्ली : भारत के विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया चल रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं की पहचान करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कई मतदाताओं ने सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि फॉर्म भरने के बावजूद उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए दफ्तर में बुलाया गया है।


ऐडमिरल अरुण प्रकाश का अनुभव

पूर्व नौसेना प्रमुख की आलोचना
रिटायर्ड ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने सोशल मीडिया पर इस प्रक्रिया की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने फॉर्म भर दिया था, लेकिन उन्हें अलग-अलग तारीखों और स्थानों पर पहचान साबित करने के लिए नोटिस मिला। उनकी उम्र 82 वर्ष है और उनकी पत्नी 78 वर्ष की हैं, फिर भी उन्हें 18 किलोमीटर की दूरी तय करके दफ्तर में उपस्थित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल फॉर्म भरने के आधार पर उनका नाम मतदाता सूची में होना चाहिए।


अन्य रिटायर्ड अधिकारियों की स्थिति

समान अनुभव साझा करते हुए
ऐडमिरल अरुण प्रकाश ने यह भी बताया कि दक्षिण गोवा से सांसद और रिटायर्ड नौसेना अधिकारी विरियातो फर्नांडीज को भी इसी तरह का नोटिस प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके नाम मतदाता सूची में लंबे समय से दर्ज थे, और चुनाव से पहले आयोग द्वारा पूरी जांच भी की गई थी।


चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

प्रक्रिया का उद्देश्य
चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा करना और डुप्लीकेट एवं मृत मतदाताओं की पहचान करना है। इस प्रक्रिया के तहत पहले बिहार में कार्यवाही की गई थी और अब इसे 12 अन्य राज्यों में लागू किया जा रहा है, जिनमें अधिकांश राज्यों में आगामी चुनाव हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि भले ही प्रक्रिया औपचारिक रूप से सभी के लिए समान हो, लेकिन बुजुर्ग और रिटायर्ड अधिकारियों के लिए इसमें समय और प्रयास की कठिनाई बनी रहती है।