चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान की तारीखों की घोषणा की
मतदान की तारीखों का ऐलान
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान की तिथियों का ऐलान कर दिया है। पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा। वहीं, तमिलनाडु में एक चरण में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक चरण में नौ अप्रैल को मतदान होगा। सभी राज्यों में वोटों की गिनती एक साथ चार मई को की जाएगी। इसके साथ ही कुछ राज्यों में उपचुनावों की भी घोषणा की गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मतदान की तारीखों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल 17.4 करोड़ मतदाता हैं, और यहां 824 सीटों पर चुनाव होंगे। चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव में जीत का दावा किया है।
पिछले चुनावों की तुलना
पिछले चुनावों की तुलना में इस बार चुनाव की घोषणा तीन हफ्ते बाद की गई है। 2021 में इन सभी राज्यों में चुनाव का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। इस बार चुनाव की शिड्यूल पिछली बार से छोटी रखी गई है। पिछली बार बंगाल में आठ चरणों में चुनाव हुए थे, जबकि असम में तीन चरणों में मतदान हुआ था।
राजनीतिक परिदृश्य
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस लगातार तीन बार जीत चुकी है और इस बार रिकॉर्ड चौथी जीत के लिए मैदान में उतरेगी। भाजपा इस बार उसे चुनौती दे रही है। असम में भाजपा दो बार से जीत रही है और हैट्रिक लगाने की कोशिश कर रही है, जबकि वहां उसका मुकाबला कांग्रेस से है। केरल में वाम मोर्चा जीत की हैट्रिक लगाने के लिए तैयार है, लेकिन उसे कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाली सरकार है, जिसका मुकाबला अन्ना डीएमके और भाजपा गठबंधन से है।
मतदाता सूची की सफाई
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से मतदाता सूची की सफाई की गई है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। एसआईआर के बाद तमिलनाडु से लगभग 74 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। इसके अलावा, वहां के 60 लाख मतदाताओं के नाम विचाराधीन श्रेणी में डाल दिए गए हैं।
