जयशंकर का अमेरिका पर बयान: भारत के खिलाफ दबाव की कोशिशें नई नहीं
भारत और अमेरिका के बीच तनाव
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों और एकतरफा टैरिफ के मुद्दों के बीच भारत पर दबाव डालने की कोशिशें कोई नई बात नहीं हैं। लक्जमबर्ग में भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की। हालांकि, उन्होंने अमेरिका का नाम नहीं लिया। जयशंकर ने 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय यह निर्णय लेना आसान नहीं था।
भारत के खिलाफ प्रतिबंधों का इतिहास
जयशंकर ने बताया कि उस समय भी भारत के खिलाफ कई प्रतिबंध और कड़े निर्णय लागू किए गए थे। उन्होंने कहा कि देशों को इन चुनौतियों का सामना करते हुए कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं और उन पर टिके रहना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल देश वही काम करते हैं जो उनके लिए फायदेमंद होते हैं, जबकि दूसरों को मुफ्त में सलाह दी जाती है।
पाकिस्तान में आतंकवाद का मुद्दा
पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए जयशंकर ने कहा कि वहां दशकों से आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर सक्रिय रहे हैं। ये शिविर गुप्त नहीं थे, बल्कि पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में खुलेआम चल रहे थे, और वहां की सरकार तथा सेना ने आतंकवाद का समर्थन किया। पाकिस्तान इसे सामान्य मानता है, जैसे कि यह उनका अधिकार हो।
भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव
भारत और अमेरिका के संबंध इस समय तनावपूर्ण स्थिति में हैं, जो हर दिन बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ तीखी टिप्पणियाँ और टैरिफ बढ़ाने की धमकियाँ अब केवल शब्दों तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीदारी की है, लेकिन अमेरिका अब इसे सहन नहीं कर रहा है। नए बिल में एक गंभीर प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत यदि रूस शांति वार्ता के लिए नहीं झुकता है, तो रूस से तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर अमेरिका 500% तक का टैरिफ लगा सकता है।
