जर्मनी का नया कानून: रूस के खतरे के बीच युवाओं को मिली अनुमति की जरूरत
जर्मनी और रूस के बीच बढ़ते तनाव
हाल ही में रूस और जर्मनी के संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसने पूरे यूरोप में हलचल मचा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने जर्मनी को मजबूर कर दिया है कि वह रूस के सामने निहत्था न रहे। इसी संदर्भ में, जर्मनी ने एक नया कानून पारित किया है, जिसके तहत 17 से 45 वर्ष के नागरिकों को यदि तीन महीने से अधिक समय के लिए विदेश जाना है, तो उन्हें अपनी सरकार और सेना से अनुमति लेनी होगी।
इस कानून के पीछे की वजहों को समझने के लिए, हमें यह देखना होगा कि हाल ही में पुतिन ने जर्मनी के कुछ व्यवसायियों को अंग्रेजी बोलने के लिए डांटा था। उन्होंने कहा कि, "आप जर्मनी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इसलिए आपको जर्मन बोलना चाहिए।" पुतिन ने यह भी बताया कि अपनी भाषा पर गर्व करना संप्रभुता का प्रतीक है।
जर्मनी का नया कानून और उसकी वजहें
जर्मनी में हाल के दिनों में एक नया कानून लागू किया गया है, जिसके अनुसार 17 से 45 वर्ष के लोग यदि तीन महीने से अधिक समय के लिए विदेश यात्रा करते हैं, तो उन्हें सरकार और सेना से अनुमति लेनी होगी। इसके साथ ही, 2008 के बाद जन्मे लोगों को एक सर्वे फॉर्म भरना होगा, जिसमें पूछा जाएगा कि क्या वे अपनी इच्छा से सेना में शामिल होना चाहेंगे।
यह कदम जर्मनी की सेना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उठाया गया है। जर्मनी को यह चिंता है कि नाटो के टूटने का खतरा है, खासकर ट्रंप के कार्यकाल के कारण। यदि नाटो टूटता है, तो रूस सबसे पहले जर्मनी पर हमला कर सकता है। वर्तमान में, जर्मनी के पास केवल 1,84,000 सैनिक हैं, जबकि रूस के पास 13 लाख सैनिक हैं।
पुतिन का बयान और जर्मनी की स्थिति
पुतिन ने जर्मनी के व्यवसायियों को चेतावनी दी थी कि उन्हें अपनी भाषा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, "आप मुझसे अंग्रेजी में सवाल क्यों पूछ रहे हैं? अपनी संप्रभुता के बारे में सोचिए।" इस बयान ने जर्मनी में एक नई बहस को जन्म दिया है।
🇷🇺🇩🇪 Putin to a German businessman:
— WAR (@warsurv) April 7, 2026
“You represent Germany… so speak German. Why use English? Think about your sovereignty.” pic.twitter.com/sdDqMaRpia
