झारखंड में कांग्रेस और जेएमएम के बीच बढ़ता तनाव: राज्यसभा चुनाव की पृष्ठभूमि
कांग्रेस और जेएमएम के बीच विवाद की जड़ें
झारखंड में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के बीच हाल ही में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई है। यह विवाद केवल सीटों के बंटवारे के कारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गहरे कारण हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी की राजनीति भी शामिल है। अगले महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले, कांग्रेस के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस के कई नेता हेमंत सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं, जबकि यह ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस स्वयं सरकार का हिस्सा है। राज्य के प्रभारी राजू ने अवैध खनन के आरोप लगाए, जबकि वरिष्ठ नेता प्रदीप यादव ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाया।
राज्यसभा चुनाव और जेएमएम की राजनीति
कांग्रेस के हमलों के दो प्रमुख कारण हैं। पहला, हेमंत सोरेन का हालिया भाजपा के प्रति सकारात्मक रुख है, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। दूसरा, राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव में कांग्रेस को एक सीट की आवश्यकता है। पिछले सात वर्षों में, जेएमएम ने कांग्रेस को एक भी सीट नहीं दी है, और इस बार भी जेएमएम दोनों सीटों पर अपना दावा कर रहा है।
हालांकि, हेमंत सोरेन को यह पता है कि कांग्रेस सरकार को गिराने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि जेएमएम के पास 34 विधायक हैं। इसके अलावा, राज्य में बहुमत का आंकड़ा 41 है, जिसमें राजद और लेफ्ट के विधायक भी शामिल हैं।
भाजपा के साथ हेमंत सोरेन की नजदीकी
राज्यसभा चुनाव के अलावा, हेमंत सोरेन की भाजपा के साथ बढ़ती नजदीकी भी एक महत्वपूर्ण कारण है। वे कांग्रेस और राजद के साथ रहते हुए भाजपा को भी संतुष्ट रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे उन्हें झारखंड के आदिवासी, मुस्लिम और ईसाई वोटों के साथ-साथ केंद्र सरकार का समर्थन भी प्राप्त होता है।
हाल ही में, यह चर्चा हुई थी कि हेमंत सोरेन भाजपा के साथ जा सकते हैं, हालांकि ऐसा नहीं हुआ। लेकिन इस चर्चा ने उन्हें लाभ पहुंचाया है, क्योंकि राज्य में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई रुकी हुई है। यदि उन्होंने दोनों उम्मीदवारों को उतारा, तो भाजपा किसी निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देकर उनकी जीत सुनिश्चित कर सकती है।
