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ट्रंप की इजरायल नीति: मुस्लिम देशों के लिए नया संकट

पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने मुस्लिम देशों को इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का निर्देश दिया है, जिससे एक नया संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने सऊदी अरब, कतर, और पाकिस्तान जैसे देशों को स्पष्ट किया कि उन्हें इजरायल को मान्यता देनी होगी। इस बातचीत में ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री से फोन करने की योजना का भी उल्लेख किया, जिससे अरब देशों के नेताओं में हड़कंप मच गया। क्या ये देश ट्रंप की मांगों को स्वीकार करेंगे? जानें इस जटिल राजनीतिक स्थिति के बारे में।
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ट्रंप की इजरायल नीति: मुस्लिम देशों के लिए नया संकट

इजरायल और अमेरिका के संबंध

मिडिल ईस्ट के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इजरायल के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर सकता है, जबकि इजरायल अमेरिका के बिना कुछ नहीं कर सकता। जून 2025 में 12 दिनों तक चले संघर्ष में अमेरिका ने इजरायल का समर्थन किया था। इसके बाद, 2026 में 40 दिनों तक चले युद्ध में भी अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ लड़ाई लड़ी। अमेरिका ने इजरायल के लिए अपने जंगी बेड़े और अन्य संसाधनों को अरब देशों की भूमि और समुद्र में तैनात किया है। इस प्रकार, इजरायल अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इजरायल के प्रति अपनी नीतियों में इसी तरह का दृष्टिकोण अपनाया।


ट्रंप का मुस्लिम देशों को संदेश

ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इजरायल को मान्यता दें और उसके साथ समझौता करें। इस स्थिति ने मुस्लिम देशों के सामने एक बड़ा धर्म संकट खड़ा कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने हाल ही में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं के साथ फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में ट्रंप ने कुछ ऐसा कहा कि सभी नेता चौंक गए और कुछ क्षणों के लिए फोन पर सन्नाटा छा गया।


ट्रंप की नई मांग

ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद, अरब और मुस्लिम देशों को इजरायल के साथ सामान्य संबंध स्थापित करने चाहिए और अब्राहम समझौते में शामिल होना चाहिए। इस बातचीत के दौरान, ट्रंप ने अचानक इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन करने की योजना का उल्लेख किया। इस पर, यूएई को छोड़कर अन्य अरब देशों के नेताओं में हड़कंप मच गया। ट्रंप के इजरायल के साथ समझौते के संदर्भ में एक चुप्पी छा गई।


पाकिस्तान की स्थिति

ट्रंप की इस मांग ने पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों को हैरान कर दिया है, जिनकी विदेश नीति इजरायल के खिलाफ है। पाकिस्तान के पासपोर्ट पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह इजरायल को मान्यता नहीं देता। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस बातचीत के दौरान कुछ समय के लिए खामोशी छा गई थी। ट्रंप ने मजाक में पूछा कि क्या सभी नेता अभी भी फोन पर हैं, जिसके बाद मुस्लिम देशों के नेता कुछ सहज हुए। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि एक दिन ईरान भी अब्राहम समझौते में शामिल हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में इस्लामिक क्रांति के चलते यह संभव नहीं है।