ट्रंप की वेनेजुएला नीति: अमेरिका का नया सैन्य कदम और वैश्विक प्रभाव
ट्रंप की एकतरफा नीतियों का प्रभाव
2025 में, ट्रंप की वैश्विक नीतियों ने एक नया मोड़ लिया। दुनिया ने उन्हें गंभीरता से लेना शुरू किया, लेकिन उनकी छवि एक स्टेट्समैन से ज्यादा एक रियल एस्टेट सेल्समैन की बन गई। उन्होंने ऊंचे टैरिफ की धमकी दी, लेकिन सौदेबाजी के दौरान इसे कम करते गए। जैसे-जैसे राष्ट्रपति पर प्रतिबंधों का दबाव बढ़ेगा, वे ऐसे कदम उठा सकते हैं जो अपेक्षा से अधिक अस्थिरता पैदा कर सकते हैं, जैसे कि वेनेजुएला के निकोलस मादुरो के खिलाफ। ट्रंप रूस, यूक्रेन, भारत, बांग्लादेश, यूरोप और खाड़ी देशों को ब्लैकमेल कर रहे हैं, कुछ को टैरिफ की धमकी देकर और कुछ को हथियारों के जरिए। अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल भंडारों पर कब्जा करने के लिए मादुरो को सत्ता से हटाने की योजना बनाई है।
ट्रंप का वेनेजुएला पर ध्यान
ट्रंप वेनेजुएला के लाखों प्रवासियों के अमेरिका आने के लिए मादुरो को जिम्मेदार मानते हैं। 2013 से अब तक लगभग आठ मिलियन वेनेजुएलावासी देश के आर्थिक संकट से भागकर अमेरिका पहुंचे हैं। बिना किसी ठोस सबूत के, ट्रंप ने मादुरो पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी जेलों को खाली कर दिया है और कैदियों को अमेरिका में प्रवास के लिए मजबूर किया है। उन्होंने वेनेजुएला के दो आपराधिक समूहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है और आरोप लगाया है कि मादुरो इनका नेतृत्व कर रहे हैं।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई
अमेरिका ने वेनेजुएला में कई ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की है, जिनमें फोर्ट ट्यूना, ला कार्लोटा, एल वोल्कान और ला गुएरा पोर्ट शामिल हैं। ये ठिकाने वेनेजुएला की सैन्य और एयरफोर्स की मुख्य सुविधाएं हैं।
वेनेजुएला का तेल निर्यात
वेनेजुएला का तेल निर्यात मादुरो सरकार की विदेशी आय का मुख्य स्रोत है, जो सरकार के बजट का आधे से अधिक हिस्सा वित्तपोषित करता है। वर्तमान में, वेनेजुएला लगभग 900,000 बैरल प्रति दिन निर्यात करता है, और चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार है। हालांकि, अमेरिका के अनुसार, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार है, लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण इसका कम उपयोग किया जा रहा है।
रूस की संभावित एंट्री
रूस ने पहले भी वेनेजुएला के समर्थन में बयान दिए हैं। हाल ही में, वेनेजुएला ने भारत से मदद मांगी है, और भारत को अपने तेल और खनिजों का उपयोग करने की अनुमति दी है।
