ट्रंप ने NATO को दी चेतावनी, कहा: 'हमारी जरूरत पर साथ नहीं आया'
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) को गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने बुधवार को कहा, “NATO तब हमारे काम नहीं आया जब हमें इसकी आवश्यकता थी, और भविष्य में भी शायद ऐसा ही होगा।”
ग्रीनलैंड पर टिप्पणी
ट्रंप ने ग्रीनलैंड का उल्लेख करते हुए कहा कि यह “बर्फ का एक बड़ा टुकड़ा है, जिसे गलत तरीके से चलाया जा रहा है।” उनके इस बयान ने NATO नेतृत्व में असहजता पैदा कर दी। यह टिप्पणी ट्रंप और NATO महासचिव मार्क रूट के बीच एक बंद कमरे में हुई बैठक के बाद आई। बैठक में ट्रंप ने NATO के प्रति अपनी नाराजगी और शिकायतें दोहराईं।
ईरान के साथ तनाव
इससे पहले, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था और गैस की कीमतें बढ़ने लगी थीं, तब ट्रंप ने संकेत दिया था कि यदि NATO सदस्य देशों ने सहयोग नहीं किया, तो अमेरिका संगठन से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है। बैठक के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की, यह कहते हुए कि NATO संकट के समय अमेरिका के साथ खड़ा नहीं हुआ। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी।
बैठक के बाद की स्थिति
“NATO WASN’T THERE WHEN WE NEEDED THEM, AND THEY WON’T BE THERE IF WE NEED THEM AGAIN. REMEMBER GREENLAND, THAT BIG, POORLY RUN, PIECE OF ICE!!!” – President Donald J. Trump pic.twitter.com/xgEV8P1n4n
— The White House (@WhiteHouse) April 8, 2026
NATO से बाहर निकलने की चर्चा
यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते के बाद हुई, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रावधान शामिल है। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि जरूरत पड़ने पर वे ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला कर सकते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने भी स्वीकार किया कि NATO से बाहर निकलने के मुद्दे पर चर्चा हुई है।
NATO का इतिहास
गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में 2023 में एक कानून पारित किया गया था, जिसके तहत किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को NATO से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है। ट्रंप लंबे समय से NATO के आलोचक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने दावा किया था कि उनके पास एकतरफा रूप से संगठन से बाहर निकलने का अधिकार है।
NATO की स्थापना
NATO की स्थापना 1949 में सोवियत संघ के खतरे के खिलाफ यूरोपीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। वर्तमान में इसके 32 सदस्य देश हैं, और इसका मुख्य सिद्धांत सामूहिक रक्षा है—जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। यह प्रावधान अब तक केवल एक बार, 2001 में 9/11 हमले के बाद अमेरिका के समर्थन में लागू किया गया था। इसके बावजूद ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव के संदर्भ में NATO पर सहयोग न करने का आरोप लगाया।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नाराजगी
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी NATO के रुख पर नाराजगी जताई। उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड, NATO सदस्य डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। इस वर्ष की शुरुआत में ट्रंप ने इस पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग की थी, हालांकि बाद में उन्होंने इस रुख को नरम कर दिया। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बैठक से पहले मार्क रूट से अलग मुलाकात की। स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईरान संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और NATO सहयोगियों के बीच बढ़ते समन्वय व जिम्मेदारी साझा करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
