ट्रम्प का मिस्र और इथियोपिया के जल विवाद में मध्यस्थता का प्रस्ताव
जल बंटवारे के मुद्दे पर ट्रम्प का पत्र
मिस्र और इथियोपिया के बीच नील नदी के जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने यह जानकारी मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को लिखे पत्र में दी है, जो ट्रम्प के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया है। ट्रम्प ने पत्र में कहा कि वह इस मुद्दे को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता को फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं।
डैम विवाद की जड़ें
इथियोपिया की ग्रैंड इथियोपियन रिनेसां डैम, जो लगभग 5 अरब डॉलर की लागत से बनी है, मिस्र और इथियोपिया के बीच विवाद का मुख्य कारण है। इस बांध का उद्घाटन 9 सितंबर को किया गया था, जिसके बाद मिस्र में असंतोष बढ़ गया।
अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन
इथियोपिया इस बांध को अपनी आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण मानता है, जबकि मिस्र का कहना है कि यह बांध अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करता है। मिस्र को चिंता है कि इससे सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन इथियोपिया इन आरोपों को खारिज करता है।
नील नदी की महत्ता
नील नदी मिस्र के लिए केवल एक जल स्रोत नहीं है, बल्कि यह देश की जीवनरेखा है। मिस्र की 90 से 95% पानी की जरूरतें इसी नदी से पूरी होती हैं, और देश का अधिकांश क्षेत्र रेगिस्तान है।
जल संकट की स्थिति
मिस्र पहले से ही जल संकट का सामना कर रहा है। 1959 के जल समझौते के अनुसार, मिस्र को नील से हर साल 55.5 अरब क्यूबिक मीटर पानी मिलता है, लेकिन अब प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 600 क्यूबिक मीटर से भी कम हो गई है।
ट्रम्प का पूर्व मध्यस्थता प्रयास
अमेरिका ने 2019 के अंत से 2020 की शुरुआत तक मिस्र और इथियोपिया के बीच जल बंटवारे पर औपचारिक मध्यस्थता की थी। यह प्रक्रिया ट्रम्प के कार्यकाल में शुरू हुई थी, लेकिन इथियोपिया ने अंततः हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
