डॉ. अमित अग्रवाल: हरियाणा की औद्योगिक नीति के प्रमुख स्तंभ
मुख्यमंत्री की टीम में डॉ. अमित अग्रवाल की भूमिका
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की टीम में कुछ अधिकारी अपनी कार्यशैली और परिणाम देने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इनमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. अमित कुमार अग्रवाल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के कमिश्नर और सचिव के रूप में, वह पिछले एक वर्ष से प्रदेश की औद्योगिक विकास रणनीति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी’ का शुभारंभ
सोमवार को गुरुग्राम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा लॉन्च की गई ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी’ की सफलता के पीछे डॉ. अमित अग्रवाल और उनकी टीम की व्यापक तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस नीति के तहत 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है, और पहले ही दिन 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने नौ नई सेक्टोरल पॉलिसियों और स्मार्ट निवेश सुविधा पोर्टल का भी शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री का बयान
इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, “हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत लाई गई यह नई नीति प्रदेश के औद्योगिक विकास को और अधिक गति देगी। इससे निवेश प्रक्रिया सरल होगी और विकास के अवसर व्यापक होंगे। हरियाणा अब इसी क्षेत्र में नेतृत्व करने जा रहा है। ‘मेक इन हरियाणा’ केवल एक औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि हरियाणा के आर्थिक विकास के अगले चरण का रोडमैप है।”
डॉ. अमित अग्रवाल का प्रशासनिक सफर
डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, जो मूल रूप से जयपुर के निवासी हैं, ने जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। हालांकि, उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के बजाय प्रशासनिक सेवा को चुना। उनके प्रशासनिक अनुभव में राज्यपाल के सचिव, आबकारी एवं कराधान आयुक्त और शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं।
हरियाणा की औद्योगिक नीति में डॉ. अमित अग्रवाल की भूमिका
हरियाणा की नई औद्योगिक नीति को मिली शानदार शुरुआत ने डॉ. अमित अग्रवाल को राज्य के निवेश और औद्योगिक विकास अभियान के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया है। उनके प्रशासनिक अनुभव और नीतिगत समझ के कारण, वे नायब सरकार के उन चुनिंदा अधिकारियों में गिने जा रहे हैं, जिन पर सरकार बड़े और चुनौतीपूर्ण दायित्वों के लिए भरोसा कर रही है।
