डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर हमला: रायता फैलने की कहानी
रायता फैलने का मुहावरा
हिंदी में एक प्रसिद्ध मुहावरा है 'रायता फैलना', जिसका अर्थ है किसी योजना या स्थिति को बिगाड़ना। जैसे दही से बना रायता गिरने पर गंदगी फैलती है, वैसे ही जब काम बिगड़ता है, तो यह मुहावरा इस्तेमाल होता है। अमेरिका को महान बनाने के प्रयास में, डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को चौंकाने वाले दावे किए हैं। ईरान में युद्ध की शुरुआत करते समय, ट्रंप ने शायद नहीं सोचा था कि यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाएगी। अब, ट्रंप के फैलाए इस रायते को समेटना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
युद्ध का पहला दिन: ईरान पर हमले की शुरुआत
28 फरवरी को, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक वीडियो में इस हमले की घोषणा की। उन्होंने इसे ईरानी आक्रामकता के जवाब में बताया और ईरान पर मिसाइलों के विकास का आरोप लगाया। ट्रंप ने ईरानी नागरिकों से अपील की कि वे अपनी सरकार की बागडोर अपने हाथ में लें। लेकिन हमलों के कुछ घंटों बाद, उन्होंने कहा कि उनके पास कई विकल्प हैं।
दूसरा दिन: पेंटागन के बयानों में विरोधाभास
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने कांग्रेस के कर्मचारियों को बताया कि उनके पास कोई खुफिया जानकारी नहीं थी जो यह संकेत दे सके कि ईरान अमेरिकी सेना पर हमला करने की योजना बना रहा था। यह जानकारी व्हाइट हाउस के सार्वजनिक बयानों के विपरीत थी।
तीसरा दिन: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का उद्देश्य
2 मार्च को, रक्षा सचिव ने युद्ध को एक लक्षित सैन्य अभियान के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ईरानी मिसाइलों और नौसेना को नष्ट करना है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह सत्ता परिवर्तन का युद्ध नहीं है।
चौथा दिन: ट्रंप का बयान
3 मार्च को, ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री के स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह उनका अपना निर्णय था और ईरानी इरादों से प्रेरित था।
पांचवां दिन: युद्ध की स्थिति
4 मार्च को, पेंटागन ने कहा कि अमेरिकी और इजरायली वायु सेना ईरान के ऊपर नियंत्रण स्थापित कर लेगी।
छठा दिन: नए नेता का चयन
5 मार्च को, ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के नए नेता के चयन में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने खामेनेई के बेटे को अस्वीकार्य बताया।
सातवां दिन: बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग
6 मार्च को, ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की। उन्होंने कहा कि इसके बाद एक नए नेता का चुनाव होगा।
