डोनाल्ड ट्रंप की पोप लियो पर तीखी टिप्पणी, अमेरिका-वेटिकन के बीच बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो की आलोचना की है, जिससे अमेरिका और वेटिकन के बीच तनाव बढ़ गया है। पोप लियो ने वैश्विक शांति की अपील की और शक्ति के प्रदर्शन को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस विवाद के पीछे की कहानी और अमेरिका की विदेश नीति पर पोप की टिप्पणियों का क्या असर होगा, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
| Apr 13, 2026, 13:55 IST
ट्रंप की आलोचना और पोप का संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो की आलोचना करते हुए उन्हें कमजोर करार दिया है। ट्रंप का कहना है कि पोप लियो अपराध और विदेश नीति के मामलों में प्रभावहीन हैं। उनके इस बयान के बाद वेटिकन सिटी और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। शनिवार को पोप लियो ने वैश्विक शांति की अपील करते हुए कहा कि स्वार्थ और धन की पूजा को समाप्त करना चाहिए। उन्होंने शक्ति के प्रदर्शन और युद्ध को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। पोप ने इसे "सर्वशक्तिमानता का भ्रम" बताया, जो तेजी से खतरनाक होता जा रहा है। उन्होंने ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध को बढ़ावा देने वाले इस भ्रम की निंदा की और वैश्विक नेताओं से तनाव कम करने और संवाद के माध्यम से शांति स्थापित करने का आग्रह किया। यह टिप्पणी सेंट पीटर बेसिलिका में एक प्रार्थना सभा के दौरान की गई, जो इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
पोप की चेतावनी और अमेरिका की प्रतिक्रिया
जनवरी में पोप लियो XIV के भाषण के बाद वेटिकन के राजदूत को अमेरिका की सैन्य शक्ति की याद दिलाई गई थी। उन्होंने बल पर आधारित कूटनीति की आलोचना की थी। पोप लियो XIV, जो अमेरिका में जन्मे पहले पोप हैं, ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों और आक्रामक विदेश नीति की भी आलोचना की है। 9 जनवरी को पोप के वार्षिक संबोधन के बाद वेटिकन के राजनयिक को चेतावनी दी गई थी कि युद्ध का चलन फिर से बढ़ रहा है। द फ्री प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने इस भाषण को ट्रंप प्रशासन के लिए एक सीधी चुनौती के रूप में देखा।
पेंटागन की कार्रवाई और पोप का अस्वीकार
खबरों के अनुसार, पेंटागन ने कार्डिनल क्रिस्टोफ़ पियरे को तलब किया, जो उस समय अमेरिका में पोप के निजी दूत थे, और उन्हें फटकार लगाई। वेटिकन के अधिकारियों ने इसे अमेरिका की सैन्य शक्ति से जुड़ी एक अप्रत्यक्ष धमकी के रूप में देखा। इसके बाद, पोप लियो ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस द्वारा अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के समारोह में आमंत्रित किए जाने को अस्वीकार कर दिया।
