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तमिलनाडु चुनाव: एमके स्टालिन की डीएमके को कम सीटों का सामना

तमिलनाडु में आगामी चुनावों में, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके को कम सीटों का सामना करना पड़ रहा है। पिछली बार 133 सीटें जीतने वाली डीएमके को इस बार 159 सीटों पर चुनाव लड़ना है। जानकारों का मानना है कि एंटी इन्कम्बेंसी और सहयोगी दलों से अपेक्षित समर्थन की कमी के कारण, डीएमके के लिए बहुमत हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस स्थिति में कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
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तमिलनाडु चुनाव: एमके स्टालिन की डीएमके को कम सीटों का सामना

डीएमके की चुनावी स्थिति

तमिलनाडु में, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनकी पार्टी, डीएमके, चुनावी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि को यह एहसास है कि इस बार उन्हें पहले जितनी सीटें नहीं मिलेंगी। पिछली बार, डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं और 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल किया था। सहयोगी दलों को 42 सीटें मिली थीं, लेकिन स्टालिन ने उन्हें सरकार में शामिल नहीं किया। इस बार, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों ने साझा सरकार बनाने का दबाव डाला है।


सीटों की संख्या में कमी

इस बार, एमके स्टालिन की पार्टी को कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें कांग्रेस को तीन अतिरिक्त सीटें देनी पड़ीं और प्रेमलता विजयकांत की पार्टी, डीएमडीके को भी 11 सीटें देकर गठबंधन में समायोजित करना पड़ा। अब, डीएमके 159 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। अनुमान है कि इस बार अकेले बहुमत हासिल करना, यानी 118 सीटें जीतना, उनके लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इसका मुख्य कारण पिछले पांच वर्षों की एंटी इन्कम्बेंसी है, साथ ही फिल्म अभिनेता विजय की पार्टी, टीवीके भी वोटों को बांट रही है। इसके अलावा, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों से डीएमके को अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है। चुनाव प्रचार में सहयोगी दल अपने-अपने क्षेत्रों में व्यस्त रहे हैं, जिससे डीएमके के वोट में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। इसका नुकसान डीएमके को होगा, लेकिन सहयोगी दलों को भी कम सीटें मिलने का अनुमान है।