तमिलनाडु चुनाव में बच्चों के इस्तेमाल पर हाई कोर्ट का सवाल
मुख्यमंत्री विजय की मुश्किलें बढ़ीं
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को जनता का समर्थन प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी सरकार का गठन हुआ। हालांकि, अब उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उनकी पार्टी, तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके), पर आरोप लगाया गया है कि वह बच्चों का उपयोग वोट मांगने के लिए कर रही है। इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। यह निर्देश अधिवक्ता वासुकी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिका में टीवीके और तमिलनाडु में विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कोर्ट ने राजनीतिक पार्टी की अयोग्यता पर उठाए सवाल
मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग से पूछा कि क्या किसी राजनीतिक पार्टी को उसके भ्रष्ट आचरण के कारण अयोग्य ठहराया जा सकता है। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता से यह भी पूछा कि क्या उम्मीदवारों की तरह राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ईसीआई के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे आयोग से निर्देश प्राप्त करें और कोर्ट को सूचित करें।
बच्चों के इस्तेमाल का मामला क्या है?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान, सत्ताधारी पार्टी टीवीके ने 21 अप्रैल को वाईएमसीए मैदान में एक चुनावी रैली का आयोजन किया। इस रैली में पार्टी ने बच्चों से अपील की कि वे अपने माता-पिता को वोट देने के लिए प्रेरित करें। याचिका में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया पर बच्चों के अपने अभिभावकों से वोट के लिए मनाने के वीडियो वायरल हुए हैं। चुनाव परिणामों के बाद, मुख्यमंत्री विजय ने बच्चों का आभार भी व्यक्त किया। अधिवक्ता वासुकी की जनहित याचिका में डीएमके और एआईडीएमके पर चुनाव के दौरान नकद बांटने के आरोप लगाए गए हैं।
सीएम विजय की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं
हालांकि विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन विजय को पहले गवर्नर हाउस से सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं मिला। जब वे दावा पेश करने पहुंचे, तो उन्हें दो बार लौटाया गया। अंततः उन्होंने राज्यपाल को अपने दावे से संतुष्ट कर सरकार बनाने का निमंत्रण प्राप्त किया और फ्लोर टेस्ट भी पास किया। अब, थलापति विजय लगातार विपक्षी दलों के निशाने पर हैं, और हालिया हाई कोर्ट के मामले से उनकी मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं।
