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तमिलनाडु में विजय का सरकार बनाने का दावा: राज्यपाल की भूमिका पर सवाल

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने जोसेफ विजय चंद्रशेखर द्वारा सरकार बनाने के दावे को स्वीकार नहीं किया, जो कि जनता के जनादेश का अपमान है। विजय ने 113 सदस्यों की सूची पेश की, लेकिन राज्यपाल ने बहुमत का आंकड़ा दिखाने को कहा। भाजपा और विजय के बीच की खटास भी इस स्थिति को और जटिल बना रही है। जानिए इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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तमिलनाडु में विजय का सरकार बनाने का दावा: राज्यपाल की भूमिका पर सवाल

राज्यपाल का निर्णय और जनादेश का अपमान

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को जोसेफ विजय चंद्रशेखर द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश करने पर तुरंत स्वीकार करना चाहिए था। विधानसभा चुनाव में जनता ने केवल एक पार्टी को जीत दिलाई है, जबकि अन्य सभी पार्टियों को हार का सामना करना पड़ा है। यदि जीतने वाली पार्टी का नेता सरकार बनाने का दावा करता है, तो राज्यपाल को इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के एसआर बोम्मई मामले में दिए गए निर्णय के अनुसार, बहुमत की परीक्षा विधानसभा में होनी चाहिए, न कि राजभवन में। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि राज्यपाल को यह विश्वास हो कि दावा पेश करने वाला नेता बहुमत साबित कर सकेगा। विजय ने राज्यपाल को 113 सदस्यों की सूची सौंपी थी, जो बहुमत से पांच कम है। इसके बावजूद, राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्यौता देने के बजाय बहुमत का आंकड़ा दिखाने को कहा, जो स्थापित परंपराओं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है।


तमिलनाडु की जनता का संदेश

राज्यपाल का यह कदम तमिलनाडु के लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का अपमान है। क्या उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि दो साल पहले बनी एक पार्टी को जनता ने 108 सीटों तक पहुंचाया है? क्या उन्हें यह नहीं समझ में आ रहा है कि 159 सीटें जीतने वाले डीएमके गठबंधन को जनता ने 74 पर ला दिया है? 18 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार केवल पांच सीटें जीत पाई हैं, जबकि चार सीटें जीतने वाली भाजपा ने सिर्फ एक सीट हासिल की है। इसका मतलब यह है कि डीएमके, अन्ना डीएमके, कांग्रेस और भाजपा सभी को तमिलनाडु की जनता ने हराया है और केवल विजय की पार्टी टीवीके को जीत दिलाई है। टीवीके सबसे बड़ी पार्टी है और विजय ने 113 का पत्र सौंपा है। यदि वे अपनी जीती हुई दो में से एक सीट से इस्तीफा देते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा 117 का होगा।


भाजपा और विजय के बीच की खटास

ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार थलपति विजय से नाराज हैं। पहले भाजपा ने विजय के साथ तालमेल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन जब उन्होंने तालमेल नहीं किया, तब भी कोई नाराजगी नहीं हुई। विजय ने भाजपा के खिलाफ प्रचार के दौरान कुछ नहीं कहा। लेकिन जब चुनाव परिणाम आए और कांग्रेस ने आगे बढ़कर उनका समर्थन किया, तब भाजपा में नाराजगी उत्पन्न हुई। भाजपा किसी भी हाल में नहीं चाहती कि कांग्रेस एक और राज्य की सरकार में शामिल हो। यदि कांग्रेस टीवीके की सरकार में शामिल होती है, तो यह आने वाले दिनों में दोनों द्रविड़ पार्टियों के बीच तालमेल का रास्ता खोल सकता है। भाजपा को चिंता है कि द्रविड़ राजनीति कमजोर होने से यदि तमिलनाडु में राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति सुधरती है, तो कांग्रेस उस राजनीति में आगे बढ़ जाएगी।