तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल आरएन रवि का विवादास्पद वॉकआउट
राज्यपाल और डीएमके सरकार के बीच टकराव
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र के आरंभ में राज्यपाल आरएन रवि और सत्तारूढ़ डीएमके सरकार के बीच एक बार फिर टकराव देखने को मिला। मंगलवार को राज्यपाल ने विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही सदन से बाहर चले गए, जिससे राजनीतिक माहौल में हलचल मच गई और राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई।
सत्र की शुरुआत सुबह 9.30 बजे हुई। परंपरा के अनुसार, राज्यपाल को सदन को संबोधित करना था, लेकिन जैसे ही सत्र की शुरुआत में तमिलनाडु राज्य गीत बजाया गया, राज्यपाल ने इसे राष्ट्रीय गान का अपमान मानते हुए नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने संक्षेप में तमिल में अभिवादन किया और सदन से बाहर चले गए। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब इसी मुद्दे पर राज्यपाल ने सदन छोड़ा।
Chennai, Tamil Nadu: Governor R. N. Ravi walked out of the Tamil Nadu Legislative Assembly, stating he was disappointed that the National Anthem was not given due respect. pic.twitter.com/J0D3SwZdYy
— News Media (@news_media) January 20, 2026
राजभवन का बयान
राजभवन की ओर से क्या जारी किया गया बयान?
राज्यपाल के वॉकआउट के तुरंत बाद राजभवन ने एक बयान जारी किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार ने उनके माइक्रोफोन को बार-बार बंद किया और जो भाषण उन्हें दिया गया, उसमें कई अप्रमाणित और भ्रामक दावे शामिल थे। बयान में यह भी कहा गया कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भाषण में नजरअंदाज किया गया।
डीएमके सरकार की प्रतिक्रिया
डीएमके सरकार ने क्या दी प्रतिक्रिया?
डीएमके सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल का व्यवहार विधानसभा की सौ साल पुरानी परंपराओं का अपमान है। उन्होंने डीएमके के संस्थापक सी एन अन्नादुरई के कथन का हवाला देते हुए राज्यपाल पद पर भी सवाल उठाए। स्टालिन ने यह भी कहा कि सरकार ने न तो राज्यपाल का और न ही उनके पद का कोई अपमान किया है।
स्पीकर का बयान
स्पीकर एम अप्पावु ने क्या कहा?
स्पीकर एम अप्पावु ने सदन को बताया कि राज्यपाल को प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी पहले ही दे दी गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव लाकर राज्यपाल का भाषण रिकॉर्ड में रखने की प्रक्रिया पूरी की।
हालांकि भाषण रिकॉर्ड में चला गया, लेकिन यह घटना राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच जारी तनाव को फिर से उजागर करती है। राज्यपाल और डीएमके सरकार पहले भी कई मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
