तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह: दो विधायकों का निष्कासन
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही आंतरिक कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन में अनुशासन बनाए रखने के लिए अपने दो विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। टीएमसी ने स्पष्ट किया है कि संगठन के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
मुख्यमंत्री का सनसनीखेज खुलासा
यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा राज्य सचिवालय में आयोजित एक आपात प्रेस वार्ता के बाद सामने आया। इस प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि इन दोनों विधायकों ने विधानसभा में 'फर्जी हस्ताक्षर' से संबंधित एक गंभीर मामले की शिकायत की थी। यह विवाद सदन में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नया नेता चुनने की प्रक्रिया से जुड़ा था।
निष्कासन आदेश का त्वरित कार्यान्वयन
मुख्यमंत्री के खुलासे के कुछ ही मिनटों बाद, तृणमूल कांग्रेस के आलाकमान ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों बागी नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया। पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इस निष्कासन पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
गंभीर आरोपों का उल्लेख
पार्टी द्वारा भेजे गए निलंबन पत्र में कई गंभीर आरोपों का जिक्र किया गया है। पत्र में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने टीएमसी के आधिकारिक प्रतीक पर विधानसभा चुनाव जीते थे, लेकिन वे महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकों से लगातार अनुपस्थित रहे और पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करते रहे।
प्राथमिक सदस्यता से निष्कासन
टीएमसी के अधिकारियों ने मामले की गहन समीक्षा के बाद संदीपान साहा और ऋतब्रत बनर्जी को तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का निर्णय लिया। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा है कि जो भी नेता तृणमूल कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ कार्य करेगा, उसके लिए अब इस संगठन में कोई स्थान नहीं है।
