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तेलंगाना की राजनीति में नया मोड़: कलवकुंतला कविता ने बनाई अपनी पार्टी

तेलंगाना की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है जब कलवकुंतला कविता ने अपनी नई पार्टी 'तेलंगाना राष्ट्र सेना' की घोषणा की। इस कदम के साथ, उन्होंने अपने पिता की पार्टी से दूरी बना ली है। मेडचल जिले में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में, कविता ने पार्टी का नाम, झंडा और एजेंडा पेश किया, जिसमें हजारों समर्थक शामिल हुए। 'TRS' नाम का महत्व और कविता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की इच्छा ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
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तेलंगाना की राजनीति में नया मोड़: कलवकुंतला कविता ने बनाई अपनी पार्टी

तेलंगाना में राजनीतिक बदलाव


तेलंगाना की राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है। पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी, कलवकुंतला कविता ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'तेलंगाना राष्ट्र सेना' की स्थापना की है। इस निर्णय के साथ, उन्होंने अपने पिता की पार्टी भारत राष्ट्र समिति से पूरी तरह से अलग होने का संकेत दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।


पार्टी का नाम और एजेंडा का अनावरण

कविता ने मेडचल जिले के मुनीराबाद में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान अपनी पार्टी का नाम, झंडा और एजेंडा का खुलासा किया। इस अवसर पर उनके समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद थी, और पूरे आयोजन में उत्साह का माहौल था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस रैली में तेलंगाना के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 50,000 लोगों ने भाग लिया। आयोजन के लिए 20 एकड़ में फैले मैदान का उपयोग किया गया, जिसे तेलंगाना आंदोलन के प्रमुख विचारक प्रोफेसर के. जयशंकर के नाम पर समर्पित किया गया था।


‘TRS’ नाम का महत्व

सूत्रों के अनुसार, कविता अपनी नई पार्टी के लिए 'TRS' नाम को बनाए रखना चाहती थीं, जो कभी तेलंगाना के अलग राज्य आंदोलन का प्रतीक था। इस नाम के माध्यम से उन्होंने यह संकेत दिया है कि उनकी पार्टी राज्य के मूल मुद्दों और जनता की आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करेगी।


कविता का संबंध 'तेलंगाना जागृति' नामक एक सामाजिक संगठन से भी रहा है, जिसने अलग तेलंगाना राज्य की मांग के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इसी संगठन को राजनीतिक पार्टी में परिवर्तित किया जाएगा, लेकिन नई पार्टी की घोषणा ने इन अटकलों को समाप्त कर दिया।


राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना

‘TRS’ नाम का ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि इसी नाम के तहत केसीआर ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने पार्टी का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति कर दिया था। अब कविता ने उसी संक्षिप्त नाम को अपनाकर यह संदेश दिया है कि वह उस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाना चाहती हैं।


इससे पहले, पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते कविता को निलंबित किया गया था। इसके बाद, उन्होंने 3 सितंबर 2025 को न केवल पार्टी की सदस्यता छोड़ी, बल्कि एमएलसी पद से भी इस्तीफा दे दिया।