दिल्ली में केजरीवाल की रैली: राजनीति में नया मोड़
जंतर मंतर पर केजरीवाल की रैली
दिल्ली के जंतर मंतर पर जनसभा आयोजित करना अब एक चुनौती बन गया है। दिल्ली पुलिस ने पहले ही इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा खाली करवा लिया है और स्थायी प्रदर्शनों को हटा दिया गया है। अब केवल छोटे प्रदर्शनों की अनुमति दी जाती है। लेकिन अरविंद केजरीवाल को एक बड़ी रैली करने की अनुमति मिल गई है। पहले, दिल्ली पुलिस ने रैली की अनुमति देने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में अचानक अनुमति दे दी गई।
केजरीवाल ने जंतर मंतर पर अपनी रैली आयोजित की, जो उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत का स्थल है। उन्होंने यहीं से शीला दीक्षित की सरकार को हराकर सत्ता में आए थे। अब वे फिर से जंतर मंतर पर लौट आए हैं।
केजरीवाल को तुरंत रैली की आवश्यकता थी, क्योंकि दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें खराब नीति घोटाले में बरी कर दिया था। इस फैसले के बाद, उन्हें उस उत्साह का लाभ उठाने के लिए तुरंत रैली करनी थी। रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने में समय लगता, जबकि जंतर मंतर पर यह करना आसान था। इसलिए, उन्होंने अनुमति मांगी और थोड़ी बातचीत के बाद दिल्ली पुलिस ने मंजूरी दे दी।
इस समय, केजरीवाल की मांगें पूरी होंगी, क्योंकि अगले साल सात राज्यों के चुनावों से पहले उन्हें भाजपा विरोधी एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करना है। इसके साथ ही, कांग्रेस पार्टी द्वारा बनाए जा रहे इस नैरेटिव को चुनौती देनी है कि राहुल गांधी सबसे साहसी नेता हैं। भाजपा चाहती है कि केजरीवाल का चेहरा भी उभरे, जिससे विपक्षी गठबंधन में दरार आ सके। कांग्रेस को इसका नुकसान अगले साल पंजाब, गोवा और गुजरात में उठाना पड़ सकता है, जो राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी को भी प्रभावित करेगा।
