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दिल्ली विधानसभा ने अतिशी के वीडियो मामले में जालंधर पुलिस की एफआईआर पर जताई आपत्ति

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने नेता प्रतिपक्ष अतिशी के वीडियो क्लिप से संबंधित जालंधर पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर गंभीर आपत्ति जताई है। नोटिस में कहा गया है कि यह मामला सदन के विशेषाधिकार क्षेत्र में आता है और इसे पहले ही फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा चुका है। स्पीकर ने इस मामले में पंजाब पुलिस के हस्तक्षेप के आधार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। सभी संबंधित दस्तावेज 12 जनवरी तक प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।
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दिल्ली विधानसभा ने अतिशी के वीडियो मामले में जालंधर पुलिस की एफआईआर पर जताई आपत्ति

दिल्ली विधानसभा सचिवालय का नोटिस

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया, जिसमें नेता प्रतिपक्ष अतिशी से संबंधित एक वीडियो क्लिप के मामले में जालंधर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की गई है।


यह नोटिस उस प्रेस विज्ञप्ति के संदर्भ में है, जिसमें कहा गया था कि 6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित एक वीडियो क्लिप को जानबूझकर संपादित किया गया था और इस पर एफआईआर दर्ज की गई।


नोटिस में बताया गया है कि संबंधित प्रेस रिलीज को 9 जनवरी को सदन की कार्यवाही के दौरान स्पीकर के ध्यान में लाया गया था। दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि यह मामला पहले से ही सदन के संज्ञान में है। अतिशी द्वारा सदन में दिए गए बयान से संबंधित यह विषय विशेषाधिकार से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ टिप्पणियां सिख गुरुओं के खिलाफ की गई थीं। इस मामले को दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा गया है।


विपक्षी सदस्यों की चिंताएं

नोटिस में कहा गया है कि विपक्षी सदस्यों के अनुरोध पर संबंधित वीडियो क्लिप को पहले ही फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा चुका है। ऐसे में, जबकि यह मामला पूरी तरह से सदन के विशेषाधिकार क्षेत्र में आता है और अध्यक्ष व सदन स्वयं इस पर विचार कर रहे हैं, पंजाब पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर सदन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।


नोटिस के अनुसार, स्पीकर ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए निर्देश दिया है कि यह स्पष्ट किया जाए कि पंजाब पुलिस ने किस आधार पर इस मामले में हस्तक्षेप किया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि विधानसभा की कार्यवाही विशेषाधिकार प्राप्त होती है और इसे सदन की संपत्ति माना जाता है। इससे संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या मुद्दा उठाने से पहले उसे स्पीकर के ध्यान में लाना अनिवार्य है।


विधानसभा सचिवालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे मामले पर अपना लिखित स्पष्टीकरण सभी प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करें। इसमें शिकायत और एफआईआर की प्रति, फॉरेंसिक रिपोर्ट सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज शामिल होंगे। यह स्पष्टीकरण 12 जनवरी तक अनिवार्य रूप से जमा कराने का निर्देश दिया गया है। यह नोटिस स्पीकर की स्वीकृति से जारी किया गया है।