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देहरादून विधानसभा में महिला आरक्षण और किसानों के मुद्दे पर गरमाई सियासत

देहरादून विधानसभा में महिला आरक्षण और किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने सरकार से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग की, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक एजेंडा बताया। किसानों के बकाए भुगतान पर भी चर्चा हुई। जानें इस सियासी माहौल की पूरी कहानी।
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देहरादून विधानसभा में महिला आरक्षण और किसानों के मुद्दे पर गरमाई सियासत

सियासी माहौल में गर्मी

देहरादून में महिला आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर विधानसभा में राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए।


महिला आरक्षण की मांग

कांग्रेस विधायक मोहम्मद निजामुद्दीन ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि सरकार से यह मांग की गई है कि राज्य में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि मौजूदा 70 सीटों के आधार पर ही यह व्यवस्था लागू की जा सकती है।


भाजपा पर आरोप

कांग्रेस विधायक भुवन कापड़ी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल केवल एक राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच में महिलाओं के हित में काम करना चाहती, तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा बहनों की लंबित मांगों पर ध्यान देती।


महिला सशक्तिकरण पर चर्चा

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस विधायक यशपाल आर्य ने कहा, "देश की आधी आबादी नारी शक्ति है, और भाजपा महिला सशक्तिकरण की बात करती है। वे 2026 में संसद में 'नारी वंदन अधिनियम' लाने की बात कर रहे हैं, जबकि यह बिल 2023 में ही पारित हो चुका था। हमारी मांग है कि 2023 में पारित बिल के आधार पर, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।"


भाजपा का पक्ष

भाजपा विधायक सविता कपूर ने कहा, "विपक्ष के रवैये को देखते हुए, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लोकसभा में पारित किया जाना था, लेकिन विपक्ष का रवैया देखिए। यह पहल किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल के लिए नहीं थी, बल्कि यह सभी महिलाओं के लाभ के लिए थी।"


किसानों के भुगतान का मुद्दा

कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति ने गन्ने की खेती करने वाले किसानों के भुगतान के मुद्दे पर कहा, "इकबालपुर मिल पर किसानों का लगभग 110-120 करोड़ रुपये का बकाया 2018-19 के सीजन से लंबित है। हमने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री से कई बार मुलाकात की है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रही है।"