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नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री समूह का नया गठन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में मंत्री समूहों को समाप्त कर दिया था, लेकिन अब उन्होंने एक नया मंत्री समूह बनाया है। इस समूह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं, जो पश्चिम एशिया की स्थिति पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस लेख में जानें कि कैसे यह नया गठन राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकता है और इसके पीछे की रणनीतियाँ क्या हैं।
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नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री समूह का नया गठन

मंत्री समूहों का इतिहास और वर्तमान स्थिति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान मंत्री समूहों को समाप्त कर दिया था। इससे पहले, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 30 मंत्री समूह सक्रिय थे, जिनमें से नौ को विशेष अधिकार प्राप्त थे। एक समय था जब प्रणब मुखर्जी एक दर्जन से अधिक मंत्री समूहों की अध्यक्षता करते थे। मोदी के सत्ता में आने के बाद स्थायी और अस्थायी मंत्री समूहों का गठन बंद कर दिया गया था। अब, तीसरी बार मोदी सरकार में, एक नया मंत्री समूह बनाया गया है।


इस नए मंत्री समूह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं, जो पश्चिम एशिया की स्थिति पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। पहले एक अनौपचारिक मंत्री समूह की चर्चा हुई थी, जिसमें अमित शाह की अध्यक्षता की बात सामने आई थी। लेकिन अब एक औपचारिक मंत्री समूह का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता राजनाथ सिंह ने की है।


मंत्री समूह की पहली बैठक

राजनाथ सिंह ने मंत्री समूह की पहली बैठक आयोजित की, जिसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ वाणिज्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। इस बैठक में कच्चे तेल की खरीद, देश में आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा के उपायों पर विचार किया गया।


राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह माना जा रहा था कि यूपीए सरकार में प्रणब मुखर्जी की भूमिका अब राजनाथ सिंह निभा रहे हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया के संकट पर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता भी की थी, और अब मंत्री समूह का नेतृत्व भी कर रहे हैं। विपक्षी दलों के साथ उनके अच्छे संबंध और दिल्ली की राजनीति में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है।