नितिन गडकरी ने लॉन्च किया इथेनॉल से चलने वाला चूल्हा, गैस की कमी का समाधान
इथेनॉल चूल्हा: एक नई तकनीक
हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में रसोई गैस (LPG) की कमी की खबरें सामने आई हैं। सरकार का कहना है कि गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन विदेशी मार्गों में समस्याओं के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है, क्योंकि भारत बड़े पैमाने पर गैस का आयात करता है। इसी बीच, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक नई तकनीक, 'इथेनॉल से चलने वाला चूल्हा', का अनावरण किया।
इथेनॉल चूल्हे की विशेषताएँ
नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने बताया कि यह चूल्हा इथेनॉल के साथ 7% पानी मिलाकर चलाया जा सकता है। यह गैस की तरह जलता है और इसकी लागत पारंपरिक गैस सिलेंडर से कम है। उन्होंने यह भी कहा कि यह तकनीक पर्यावरण के लिए लाभकारी है।
🚨 HUGE if its true ..
— CryptoWala (@cryptowalax) May 25, 2026
NITIN GADKARI announces ETHANOL-OPERATED stove technology.
By mixing 7% water in ethanol, a stove-like flame can be generated 😳
He says it is CHEAPER than conventional commercial fuel. pic.twitter.com/RjQPVjYUML
गडकरी ने बताया कि इस तकनीक की खासियत यह है कि यह सीधे इथेनॉल से नहीं चलती, बल्कि इथेनॉल और पानी के मिश्रण से उत्पन्न होने वाली लौ पूरी तरह से साफ होती है। यह पारंपरिक गैस सिलेंडर और मिट्टी के तेल के मुकाबले एक सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त विकल्प है।
इथेनॉल चूल्हे के लाभ
पैसों की बचत: गडकरी के अनुसार, यह चूल्हा कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की तुलना में सस्ता होगा, जिससे परिवारों और होटलों का खर्च कम होगा।
स्वास्थ्य और सफाई: यह चूल्हा लकड़ी, कोयले या केरोसिन की तरह धुआं नहीं छोड़ता, जिससे घर के अंदर की हवा साफ रहती है।
देश का लाभ: भारत अपनी गैस और तेल की जरूरत का 85% आयात करता है, जिससे देश का धन बाहर चला जाता है। इथेनॉल के उपयोग से यह धन बचेगा।
किसानों के लिए अवसर: इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्के से बनता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
चुनौतियाँ
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस चूल्हे को हर घर में पहुंचाना आसान नहीं होगा। इथेनॉल एक ज्वलनशील तरल है, इसलिए इसके सुरक्षित उपयोग के लिए सरकार को कड़े नियम और सुरक्षा मानक स्थापित करने होंगे।
