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निशिकांत दुबे ने चीन मुद्दे पर विपक्ष को किया कठोर आलोचना

भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को चीन के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने राहुल गांधी को 'प्रोपेगैंडा के नेता' करार दिया और कहा कि विपक्ष इस महत्वपूर्ण विषय पर संसद में चर्चा से बच रहा है। दुबे ने 1962 के भारत-चीन युद्ध और उसके बाद के घटनाक्रमों पर भी प्रकाश डाला। जानें इस विवादास्पद बयान की पूरी कहानी।
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निशिकांत दुबे ने चीन मुद्दे पर विपक्ष को किया कठोर आलोचना

चीन के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना


नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को चीन के मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा नहीं हो रही है, जबकि वह इस विषय पर अपनी बात रखना चाहते थे। दुबे ने नेता विपक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इतना कमजोर विपक्ष और 'प्रोपेगैंडा के नेता' जैसा कोई नेता उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी नासमझी को घमंड में बदलकर लगातार बयानबाजी कर रहा है।




दुबे ने कहा कि यह सवाल चीन का है और पूरी दुनिया जानती है कि चीन पहले भारत का पड़ोसी नहीं था। नेपाल, भूटान और तिब्बत उस समय तीन बफर स्टेट थे। 1950 में तिब्बत पर चीन का नियंत्रण स्थापित होने के बाद ही चीन भारत का पड़ोसी बना। दुबे ने बताया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध में चीन ने लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, जिसमें अक्साई चिन भी शामिल है, पर कब्जा कर लिया। इसके बाद भी कई सवाल अनुत्तरित रहे हैं।


इंदिरा गांधी पर तीखी टिप्पणी


उन्होंने यह भी कहा कि 1969 में तत्कालीन सरकार के गृहमंत्री विद्याचरण शुक्ला ने संसद में बताया था कि चीन ने 1962 के बाद अपने जासूसों को दूतावास के जरिए सक्रिय किया और भारत में आर्थिक तथा वैचारिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की। निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी पर भी तीखी टिप्पणी की। राहुल गांधी पर फिर से हमला करते हुए दुबे ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रहा है। उनका कहना था कि यदि इस विषय पर चर्चा होती है तो कई बातें सामने आ जाएंगी।