नीतीश कुमार की अंतिम राजनीतिक यात्रा और सत्ता हस्तांतरण की तैयारी
नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा का समापन
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी अंतिम राजनीतिक यात्रा पूरी कर ली है। राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद उन्होंने समृद्धि यात्रा की शुरुआत की थी। पिछले वर्ष से शुरू हुई इस यात्रा में वे उत्तर बिहार से लेकर मध्य और दक्षिण बिहार तक गए, लेकिन पूर्वी क्षेत्र, विशेषकर सीमांचल, उनकी यात्रा से वंचित रह गया। इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्वांचल में तीन दिन बिताए, जिसके बाद नीतीश को राज्यसभा के लिए नामांकन कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। नामांकन के बाद, उन्होंने सीमांचल में समृद्धि यात्रा की, जिसमें पूर्णिया, किशनगंज और अन्य क्षेत्रों का दौरा किया और बेगूसराय में यात्रा का समापन किया। हर जगह यह कहा गया कि वे कहीं नहीं जा रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह उनकी अंतिम राजनीतिक यात्रा थी।
सत्ता हस्तांतरण की तैयारी
नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद संकेत दिया कि वे अब जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बिहार में सत्ता परिवर्तन की तैयारी चल रही है, जो आठ से 12 अप्रैल के बीच संभव है। ध्यान देने योग्य है कि नौ अप्रैल को राज्यसभा के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यह पहली बार होगा कि जनता दल यू के हाथ से मुख्यमंत्री का पद जाएगा। इसके साथ ही, यह भी पहली बार होगा कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं करेंगे। हालांकि, भाजपा उनकी पसंद से मुख्यमंत्री का नाम तय कर रही है, जिसमें सम्राट चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। नीतीश कुमार उन्हें पसंद करते हैं और उन्होंने जनता से आशीर्वाद भी दिलवाया है।
भाजपा और जदयू के बीच बातचीत
जानकार सूत्रों का कहना है कि सत्ता हस्तांतरण की शर्तों पर बातचीत चल रही है। नीतीश कुमार चाहते हैं कि भाजपा का मुख्यमंत्री बनने पर उप मुख्यमंत्री जनता दल का हो और गृह मंत्रालय तथा स्पीकर का पद भी जदयू को मिले। लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। भाजपा ने नीतीश को याद दिलाया है कि चार महीने पहले तक गृह मंत्रालय हमेशा मुख्यमंत्री के पास रहा है। नीतीश कुमार ने जब राजद के साथ गठबंधन किया था, तब उन्होंने गृह मंत्रालय और स्पीकर का पद अपने पास रखा था। भाजपा 2015 के फॉर्मूले को लागू करना चाहती है। इसके अलावा, जदयू के हरिवंश, जो राज्यसभा के उपसभापति थे, अब रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह जदयू को उपसभापति का पद मिलेगा या नहीं, यह भी चर्चा का विषय है।
