नेपाल की आर्थिक स्थिति पर एफएटीएफ की चेतावनी: संकट में दोस्ती
नेपाल की मुश्किलें बढ़ीं
एक समय था जब नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों पर गर्व करता था, लेकिन अब वह एक गंभीर संकट में फंस चुका है। हाल ही में, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण को रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एफएटीएफ ने नेपाल को एक गंभीर चेतावनी दी है। इस अल्टीमेटम ने काठमांडू से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी है।
नेपाल ने अपनी आंतरिक राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते भारत से दूरी बना ली है, जबकि उसके अंदर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण का खेल जारी है। अब एफएटीएफ की एशिया पेसिफिक ग्रुप (एपीजी) ने नेपाल को अंतिम चेतावनी दी है। नेपाल के पास केवल चार महीने का समय है, अन्यथा उसे वैश्विक आर्थिक प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल की चेतावनी
रिपोर्टों के अनुसार, एपीजी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हाल ही में काठमांडू का दौरा किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डेविड शेन कर रहे थे, जो इस क्षेत्र में 2002 से कार्यरत हैं। उनकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, यह नेपाल के लिए अंतिम उच्च स्तरीय हस्तक्षेप है।
नेपाल को सितंबर 2026 में होने वाली समीक्षा से पहले ठोस परिणाम दिखाने होंगे। एपीजी के अधिकारियों ने नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, और सुरक्षा बलों के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की। सूत्रों के अनुसार, एपीजी ने नेपाल की प्रगति को निराशाजनक बताया और स्पष्ट किया कि सुधार नहीं होने पर ब्लैक लिस्ट होने के लिए तैयार रहना होगा।
नेपाल की राजनीतिक स्थिति
पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की राजनीति में अजीब बदलाव आया है। कम्युनिस्ट सरकारों के दौरान, नेपाल ने भारत के साथ सीमाओं को लेकर विवाद खड़ा किया और कई बार ऐसे बयान दिए जिससे रिश्तों में खटास आई। जब आप अपने सबसे बड़े आर्थिक साझेदार को नजरअंदाज करते हैं, तो आपकी आंतरिक व्यवस्था कमजोर हो जाती है।
भारत ने हमेशा नेपाल की सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता में मदद की है, लेकिन नेपाल का ध्यान भारत से भिड़ने में रहा। इसके परिणामस्वरूप, मनी लॉन्ड्रिंग और सोने की तस्करी करने वाले अपराधी सक्रिय हो गए हैं। नेपाल की जांच एजेंसियां इन अपराधियों पर नियंत्रण पाने में असफल रही हैं। एफएटीएफ ने पाया कि नेपाल में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की संख्या बहुत कम है।
सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियाँ
नेपाल में बड़ी मछलियां खुलेआम घूम रही हैं, जबकि कानून प्रवर्तन एजेंसियां कमजोर पड़ रही हैं। इसके अलावा, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में धांधली और राजनीतिक अस्थिरता भी एक बड़ी समस्या है। बार-बार चुनाव और राजनीतिक बदलाव के कारण आवश्यक सुधार लागू नहीं हो पा रहे हैं।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस बहाने को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। नेपाल को नवंबर 2025 तक एक राष्ट्रीय जोखिम आकलन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, जो अब तक अधूरी है। यह नेपाल की गंभीरता की कमी को दर्शाता है।
