नेपाल में केपी ओली की गिरफ्तारी पर विवाद, सीपीएन-यूएमएल ने उठाए सवाल
सीपीएन-यूएमएल का बयान
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली की पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) (सीपीएन-यूएमएल) ने शुक्रवार को कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट में ओली की गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस आधार नहीं है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट जानबूझकर बनाई गई है।
प्रदीप ग्यावली का राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
पूर्व विदेश मंत्री और पार्टी के नेता प्रदीप ग्यावली ने कहा कि यह कार्रवाई उनके अध्यक्ष के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है। उन्होंने बताया कि इस गिरफ्तारी के विरोध में, सीपीएन-यूएमएल ने एक आपातकालीन सचिवालय बैठक बुलाई है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ओली को सितंबर 2025 में जनरेशन जेड के नेतृत्व में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के कथित दमन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
नेपाल पुलिस ने ओली को भक्तपुर स्थित उनके निवास से गिरफ्तार किया। इसके साथ ही पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया। ये गिरफ्तारियां गृह मंत्रालय द्वारा दर्ज की गई एक औपचारिक शिकायत के बाद हुईं, जिसके बाद जांच शुरू की गई और गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए। काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई पूर्व विशेष न्यायालय के न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग की सिफारिशों के आधार पर की गई।
आपराधिक लापरवाही के आरोप
ओली पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 का उल्लंघन किया है, जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। आयोग ने सिफारिश की है कि ओली, लेखक और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग पर आपराधिक लापरवाही के लिए मुकदमा चलाया जाए।
जनरेशन Z के विरोध प्रदर्शनों का प्रभाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्रवाई का परिणाम आपराधिक लापरवाही और गैरजिम्मेदारी है, जिसमें संभावित हिंसा की पूर्व सूचना पर कार्रवाई न करने के कारण कई मौतें हुईं। सितंबर 2025 में नेपाल में हुए जनरेशन Z के विरोध प्रदर्शनों के दौरान 77 लोग मारे गए और अरबों डॉलर की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिया गया।
