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नेपाल में युवा आंदोलन: भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष और नई सरकार की चुनौतियाँ

नेपाल में युवा आंदोलन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई लहर को जन्म दिया है। मुकेश अवस्थी जैसे युवा नेताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर इस संघर्ष में भाग लिया। हाल के प्रदर्शनों में हुई हिंसा और नई प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के चुनावों के वादे ने राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की निराशा और सरकार की आलोचना ने सवाल उठाए हैं कि क्या वास्तव में कोई बदलाव आएगा। जानें इस संघर्ष की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
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नेपाल में युवा आंदोलन: भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष और नई सरकार की चुनौतियाँ

युवाओं का संघर्ष और सरकार की प्रतिक्रिया

सितंबर के एक खूबसूरत दिन, मुकेश अवस्थी ने ऑस्ट्रेलिया में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जाने की योजना बनाई थी। लेकिन उन्होंने नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे युवा आंदोलन में भाग लेने का निर्णय लिया। इस दौरान, सुरक्षा बलों की गोलीबारी में उनका पैर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके कारण उन्हें काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में अपनी टांग कटवानी पड़ी। मुकेश ने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी खोया, उसके लिए उन्हें गहरा अफसोस है।


काठमांडू में 8 सितंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों में 76 लोगों की जान गई और 2,300 से अधिक लोग घायल हुए। जेन जेड कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों के दबाव में, 12 सितंबर को सुशीला कार्की को नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। कार्की ने मार्च में नए चुनाव कराने का आश्वासन दिया।


नवीनतम राजनीतिक स्थिति

हालांकि, अंतरिम सरकार और उसके नेताओं की आलोचना उन लोगों द्वारा की जा रही है जिन्होंने इन प्रदर्शनों में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद थी कि नए बदलाव आएंगे, लेकिन अब वे निराश हैं। मुकेश ने कहा कि उन्हें अपने निर्णय पर पछतावा है, क्योंकि नई सरकार से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है। भ्रष्टाचार का अंत होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसी ने अभी तक कोई महत्वपूर्ण मामला दर्ज नहीं किया है जिसमें प्रमुख राजनीतिक हस्तियों का नाम हो। प्रदर्शनकारियों द्वारा आरोपित राजनेता आगामी चुनावों में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने अंतरिम सरकार के गठन के समय कहा था कि उसका मुख्य उद्देश्य चुनाव कराना है, लेकिन संविधान में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है।