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नोएडा बॉर्डर पर पुलिस ने रोका सपा नेता माता प्रसाद पांडेय को

नोएडा में सपा नेता माता प्रसाद पांडेय को पुलिस ने मजदूरों से मिलने जाते समय रोक दिया। यह कार्रवाई राज्य सरकार के खिलाफ उनकी आवाज को दबाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। पांडेय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि पुलिस ने मजदूरों के प्रदर्शन के पीछे सोशल मीडिया के फर्जी अकाउंट्स का हाथ होने का दावा किया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और सियासी हलचल।
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नोएडा बॉर्डर पर पुलिस ने रोका सपा नेता माता प्रसाद पांडेय को

नोएडा में पुलिस की कार्रवाई

Noida (U.P.): यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को नोएडा सीमा पर पुलिस ने रोक दिया। वे मजदूरों के सैलरी विवाद के चलते वहां जा रहे थे और समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने पहले उन्हें लखनऊ में उनके निवास पर नजरबंद कर दिया था। वृंदावन योजना सेक्टर-11 में उनके घर के बाहर सुरक्षा बल तैनात किया गया था ताकि वे बाहर न निकल सकें। हालांकि, उन्होंने पुलिस को चकमा देकर वहां से निकलने में सफलता पाई, लेकिन नोएडा बॉर्डर पर पहुंचते ही उन्हें रोक लिया गया।


राज्य सरकार पर हमला

माता प्रसाद पांडेय ने इस कार्रवाई पर राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “यदि योगी आदित्यनाथ डरते हैं, तो वे पुलिस को आगे कर देते हैं। सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।” उन्होंने यह भी कहा कि वे मजदूरों और आम जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे, चाहे उन्हें नजरबंद ही क्यों न किया जाए। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।


सपा का प्रतिनिधिमंडल मजदूरों से मिलने जा रहा था

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के बाद समाजवादी पार्टी का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मजदूरों से मिलने के लिए जा रहा था। यह दौरा पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर आयोजित किया गया था। इस प्रतिनिधिमंडल में माता प्रसाद पांडेय के अलावा राजकुमार भाटी, सुधीर भाटी, आश्रय गुप्ता, शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, अतुल प्रधान, पंकज कुमार मलिक और शशांक यादव शामिल थे।


वहीं, नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूरों के प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस के अनुसार, इस बवाल के पीछे पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल का हाथ हो सकता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि कुछ फर्जी अकाउंट्स के जरिए भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट किए गए, जिनमें हिंसा और मौतों की गलत जानकारी फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है और प्रशासन व विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।