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नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के आंदोलन की साजिश: मुख्य आरोपी तमिलनाडु से गिरफ्तार

नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के हालिया आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के पीछे एक सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश हुआ है। जांच में मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है। वह इस साजिश का केंद्र था और विभिन्न संगठनों के बीच तालमेल के संकेत मिले हैं। दस्तावेजों से पता चला है कि प्रदर्शन की योजना महीनों पहले बनाई गई थी। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की फंडिंग और अन्य संदिग्धों की पहचान में जुटी हैं। जानें इस मामले की पूरी कहानी।
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नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के आंदोलन की साजिश: मुख्य आरोपी तमिलनाडु से गिरफ्तार

नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों का आंदोलन और हिंसा


नोएडा में हाल ही में फैक्ट्री श्रमिकों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के संबंध में जांच एजेंसियों ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसकी तैयारी कई महीनों से चल रही थी। विभिन्न संगठनों के माध्यम से लोगों को एकत्रित कर एक बड़े आंदोलन का रूप दिया गया और इसी के तहत स्थिति को बिगाड़ने की योजना बनाई गई।


मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। वह जून 2025 से नोएडा में रह रहा था और इससे पहले गुरुग्राम में था। नोएडा में उसने एक किराए के फ्लैट को पूरी साजिश का केंद्र बना लिया था। जांच के अनुसार, इसी स्थान से पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।


आदित्य आनंद की पृष्ठभूमि

आदित्य आनंद की पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में है। उसने लेबर स्टडी में एमए किया है और दिल्ली के हंसराज कॉलेज से पढ़ाई की है। वह खुद को एक आईटी कंपनी से जुड़ा बताता था और उसकी अच्छी आय के कारण वह इस गतिविधि में आर्थिक सहयोग भी कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि 2022 में कैंपस प्लेसमेंट के दौरान उसकी कुछ कट्टर वामपंथी समूहों से नजदीकियां बढ़ीं, जिसके बाद वह इस नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बन गया।


संगठनों के बीच तालमेल

एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में चार प्रमुख संगठनों आरडब्ल्यूपीआई, मजदूर बिगुल दस्ता, नौजवान भारत सभा और दिशा ऑर्गनाइजेशन के बीच आपसी तालमेल के संकेत मिले हैं। ये सभी संगठन एक साझा योजना के तहत काम कर रहे थे और 2022 से ही इस दिशा में गतिविधियां चल रही थीं।


महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी

नोएडा के अरुण विहार क्षेत्र में छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनमें पूरी योजना का विस्तृत खाका मौजूद है। इन दस्तावेजों में यह तक लिखा गया है कि कब और कहां लोगों को इकट्ठा करना है, प्रदर्शन को किस तरह आगे बढ़ाना है और सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए भीड़ को कैसे संगठित करना है।


जांच में क्या सामने आया?

जांच में यह भी सामने आया है कि मानेसर, करावल नगर और नोएडा को जोड़ते हुए चरणबद्ध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी। फरवरी से बड़े स्तर पर हड़ताल की तैयारी थी, जिसका उद्देश्य केवल मजदूरों की मांगें उठाना नहीं, बल्कि सड़कों को जाम कर प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना था। मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में इस साजिश को अंतिम रूप दिया गया और इसे मई 2026 तक जारी रखने की रणनीति बनाई गई थी।


फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग, संभावित विदेशी संबंधों और युवाओं की भर्ती के तरीकों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। पुलिस इस साजिश से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुटी है।