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पंजाब में आम आदमी पार्टी के सांसदों का भाजपा में शामिल होना: राजनीतिक समीकरणों पर असर

पंजाब में आम आदमी पार्टी के छह में से पांच राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिसमें राघव चड्ढा और संदीप पाठक शामिल हैं। यह राजनीतिक बदलाव आगामी विधानसभा चुनावों पर क्या असर डालेगा? क्या भाजपा आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश करेगी? जानें इस लेख में कि कैसे ये घटनाक्रम पंजाब की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
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पंजाब में आम आदमी पार्टी के सांसदों का भाजपा में शामिल होना: राजनीतिक समीकरणों पर असर

आम आदमी पार्टी के सांसदों का भाजपा में शामिल होना

पंजाब में आम आदमी पार्टी के छह में से पांच राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं। इनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं, जिन्हें दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा देकर पंजाब भेजा गया था और वहां से राज्यसभा में भेजा गया। आम आदमी पार्टी छोड़ने वालों में संदीप पाठक भी हैं, जिन्होंने पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार की थी। वे पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य रहे हैं। इन दोनों के अलावा अन्य सांसदों का राजनीतिक महत्व कम है। हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी का पंजाब की राजनीति में कोई खास स्थान नहीं है, और स्वाति मालीवाल का दिल्ली में भी कोई खास प्रभाव नहीं है।


अब यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा इन दो नेताओं के सहारे पंजाब में कुछ कर पाएगी? क्या आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जाएगी? यह संभव है, क्योंकि अगले 10 महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कई विधायक विभिन्न आरोपों में फंसे हुए हैं और केंद्रीय एजेंसियां उनकी जांच कर रही हैं। इसके अलावा, भगवंत मान की सरकार के कार्यों से ऐसा माहौल नहीं है कि विधायक जीतने की उम्मीद कर सकें। राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने पंजाब में आप को चुनाव लड़ाया था और कई उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिससे कई विधायक अब भी उनके प्रति वफादार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आप के करीब 45 विधायक चड्ढा और पाठक के करीबी माने जाते हैं और उनके निर्णयों पर असर डाल सकते हैं।


हालांकि, भाजपा अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है। यदि वह आप के सभी विधायकों को अपने में शामिल कर भी ले, तो भी वह दहाई में सीटें नहीं जीत पाएगी। भाजपा को यह भी समझ है कि आम आदमी पार्टी से जीते अधिकांश विधायक पार्टी की लोकप्रियता के बल पर जीते थे। दूसरी संभावना यह है कि आप में विभाजन कर भगवंत मान की सरकार को गिराने की कोशिश की जाए। चड्ढा किसी अन्य नेता को आगे करके सरकार बनाने का दावा कर सकते हैं। यदि सरकार नहीं बनती है, तो केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती है। पंजाब सीमावर्ती राज्य है और वहां की स्थिति अच्छी नहीं है। पाकिस्तान से हथियार और नशा भारी मात्रा में आ रहा है, और कट्टरपंथियों का प्रभाव भी बढ़ रहा है। यदि आप में टूट होती है और एक नई पार्टी का गठन होता है, तो भाजपा उसके साथ तालमेल कर सकती है। हालांकि, इससे भी ज्यादा लाभ नहीं होगा। भाजपा पंजाब के राजनीतिक क्षेत्र को और विभाजित करने की कोशिश कर सकती है ताकि चुनाव के बाद सरकार गठन में उसकी भूमिका बनी रहे।