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पंजाब विधानसभा में पेश हुआ बेअदबी रोकने वाला विधेयक, सख्त सजा का प्रावधान

पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी रोकने के लिए एक नया विधेयक पेश किया है, जिसमें दोषियों के लिए उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। विपक्ष ने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन कुछ सवाल भी उठाए। विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। जानें इस विधेयक के अन्य महत्वपूर्ण पहलू और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।
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पंजाब विधानसभा में पेश हुआ बेअदबी रोकने वाला विधेयक, सख्त सजा का प्रावधान

पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र

चंडीगढ़- पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026 को सदन में प्रस्तुत किया है।


विधेयक के मुख्य प्रावधान

विधेयक में क्या है प्रावधान
इस संशोधन विधेयक में बेअदबी के मामलों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे अधिकतम उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक ग्रंथों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं पर कड़ा नियंत्रण लगाने के लिए लाया गया है।


कानून बनने की प्रक्रिया

कानून बनने की प्रक्रिया
विधानसभा में विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ही यह कानून लागू होगा। सरकार का दावा है कि यह राज्य का विषय है, इसलिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि कोई कानूनी विवाद नहीं होता है, तो यह कानून अप्रैल के अंत या मई के पहले सप्ताह तक लागू हो सकता है। हालांकि, विवाद की स्थिति में इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जा सकता है, जिससे प्रक्रिया में देरी हो सकती है।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्ष ने समर्थन के साथ उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उन्होंने आग्रह किया कि इस मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट को सदन में पेश किया जाना चाहिए। स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने स्पष्ट किया कि कमेटी अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेगी और संबंधित मामलों की जांच भी करेगी। बहस के दौरान बाजवा ने सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के दावे किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं आए।


मुख्यमंत्री का जवाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल और प्रशासनिक फैसले सरकार का अधिकार क्षेत्र है। इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन का माहौल गर्म हो गया।


पिछले प्रयास

पहले भी लाया गया था बिल
यह ध्यान देने योग्य है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में सरकार ने पंजाब पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक पेश किया था, जिसमें सभी प्रमुख धर्मों के ग्रंथों को शामिल किया गया था। उस विधेयक में 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था, जिसे आगे विचार के लिए सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया था।