पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच संघर्ष
पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति
पश्चिम एशिया में तनाव ने गंभीर रूप ले लिया है, जहां ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच युद्ध ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है। सोमवार को, संघर्ष का दायरा अचानक बढ़ गया जब तेहरान समर्थित मिलिशिया ने सक्रिय रूप से हमलों में भाग लिया, जिससे कई देशों में संघर्ष फैल गया। ईरान ने इजराइल और अन्य अरब देशों पर मिसाइलें दागी, जबकि लेबनान से हिजबुल्लाह ने रॉकेट और ड्रोन के माध्यम से इजराइल को निशाना बनाया। इसके जवाब में, इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों और दक्षिणी लेबनान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 31 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इजराइल ने एक लाख से अधिक आरक्षित सैनिकों को तैनात किया है और लंबे संघर्ष की चेतावनी दी है।
अमेरिका और इजराइल की रणनीति
इस गंभीर टकराव के पीछे अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की लक्षित हत्या को एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इसके बाद, ईरान ने त्वरित प्रतिक्रिया में अलीरेजा अराफी को अंतरिम सर्वोच्च नेता नियुक्त किया, ताकि सत्ता संरचना में निरंतरता बनी रहे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अभियान शुरू होने के बाद से सैकड़ों लोग मारे गए हैं। ईरानी रेड क्रेसेंट के अनुसार, 131 शहरों में हमलों के चलते कम से कम 555 लोगों की जान जा चुकी है। इजराइल में 11 और लेबनान में 31 मौतें दर्ज की गई हैं।
कुवैत में अमेरिकी विमानों का हादसा
संघर्ष के बीच, कुवैत में एक चौंकाने वाली घटना हुई। अमेरिकी सेना ने बताया कि सक्रिय युद्ध अभियान के दौरान कुवैत की वायु सुरक्षा ने गलती से तीन अमेरिकी एफ 15 ई लड़ाकू विमानों को मार गिराया। सभी छह पायलट सुरक्षित बाहर निकल आए और उन्हें बचा लिया गया। इस घटना की जांच जारी है। इस बीच, तेहरान समर्थित समूहों द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर को भी निशाना बनाने की खबरें आई हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
ऊर्जा सुरक्षा पर संकट
इस बीच, ऊर्जा सुरक्षा पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईरानी ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब की रस तनुरा रिफाइनरी को प्रभावित किया, जिससे अस्थायी रूप से संचालन ठप करना पड़ा। यह संयंत्र प्रतिदिन पांच लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का प्रसंस्करण करता है। होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास हमलों और धमकियों ने वैश्विक आपूर्ति मार्गों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने कहा है कि फिलहाल ईरान के परमाणु स्थलों को नुकसान का कोई संकेत नहीं है, लेकिन सक्रिय रिएक्टरों की मौजूदगी किसी गंभीर रेडियोलाजिकल हादसे का जोखिम बढ़ाती है।
क्षेत्रीय तनाव का विस्तार
तनाव का असर खाड़ी क्षेत्र से बाहर भी दिख रहा है। ओमान के तट से 52 समुद्री मील दूर एमकेडी व्योम नामक तेल टैंकर पर मानवरहित नौका से हमला किया गया, जिससे इंजन कक्ष में विस्फोट और आग लग गई। इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। बढ़ते संघर्ष के बीच हवाई क्षेत्र बंद किए जा रहे हैं, दूतावासों ने चेतावनी जारी की है और कई देशों ने अपने नागरिकों की निकासी शुरू कर दी है। इस बीच, ईरान ने इजराइली प्रधानमंत्री के कार्यालय को भी निशाना बनाने का दावा किया है।
भविष्य की अनिश्चितता
वाशिंगटन और तेल अवीव को उम्मीद थी कि शीर्ष नेतृत्व को हटाने से ईरान की सत्ता संरचना कमजोर हो जाएगी, लेकिन तेहरान ने त्वरित उत्तराधिकार और सैन्य सक्रियता से संकेत दिया है कि व्यवस्था इतनी आसानी से बिखरने वाली नहीं है। अब सवाल यह है कि क्या यह निर्णायक प्रहार अपेक्षित परिणाम देगा या फिर पूरा क्षेत्र और गहरे अस्थिरता के दौर में धकेल दिया जाएगा। इस मुद्दे पर रक्षा विशेषज्ञ कर्नल टीपी त्यागी के विचारों पर ध्यान दें।
