पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी हलचल: कांग्रेस की स्थिति पर सवाल
चुनाव की तैयारी और प्रमुख दलों की रणनीतियाँ
देश के दो महत्वपूर्ण राज्यों में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने वाली है। पश्चिम बंगाल की 152 और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि बंगाल की शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैलियों में सक्रियता दिखाई है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में 15 दिनों तक रहने का निर्णय लिया है। इस बीच, कांग्रेस पार्टी के लिए चुनावी परिदृश्य कुछ निराशाजनक प्रतीत हो रहा है। राहुल गांधी ने तमिलनाडु में प्रचार से दूरी बनाए रखी है और पश्चिम बंगाल में भी उनकी उपस्थिति कम रही है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का ध्यान केरल, पुडुचेरी और असम पर केंद्रित रहा है। हालांकि, इन राज्यों में भी उनका प्रचार प्रधानमंत्री मोदी के मुकाबले कम प्रभावी रहा है। केरल में भाजपा का कोई खास आधार नहीं है, और पिछले चुनाव में उसने अपनी एकमात्र सीट भी खो दी थी। इस बार भाजपा के नेता तीन से पांच सीटें जीतने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन मोदी ने प्रचार में कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने तमिलनाडु में भी प्रचार किया, जहां उनकी पार्टी केवल 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
कांग्रेस ने इन चुनावों में ज्यादा जोर नहीं दिया है। राहुल गांधी ने पुडुचेरी में प्रचार किया, लेकिन तमिलनाडु में उनकी उपस्थिति नहीं रही। कहा जा रहा है कि चुनावों के बाद राहुल तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में जनसभाओं को संबोधित करेंगे, लेकिन यह केवल औपचारिकता के लिए होगा। तमिलनाडु में कांग्रेस ने डीएमके के साथ मिलकर तीन सीटें अधिक ली हैं और 28 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पिछले चुनाव में उसने 25 में से 18 सीटें जीती थीं। वहीं, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को खाता खोलने की आवश्यकता है, और वह सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पूर्व सांसद मौसम बेनजीर नूर के तृणमूल कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस में लौटने के बाद उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस मुर्शिदाबाद में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। हालांकि, पार्टी के बड़े नेता चुनाव को समाप्त मान रहे हैं।
