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पश्चिम बंगाल कांग्रेस में सालबोनी सीट पर बवाल: कार्यकर्ताओं का असंतोष बढ़ा

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए सभी प्रत्याशियों की घोषणा की है, लेकिन सालबोनी सीट पर कार्यकर्ताओं का असंतोष बढ़ गया है। अरूप मुखर्जी को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की और आगजनी की। इस घटना ने कांग्रेस की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व अब इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा है, अन्यथा चुनाव में नुकसान हो सकता है।
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पश्चिम बंगाल कांग्रेस में सालबोनी सीट पर बवाल: कार्यकर्ताओं का असंतोष बढ़ा

कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए अपने सभी प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। कई स्थानों पर कार्यकर्ता उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार में जुट गए हैं, लेकिन पश्चिमी मेदनीपुर जिले की सालबोनी विधानसभा सीट पर पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से फैल रहा है, जिसमें कुछ कार्यकर्ता इस घोषणा से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं और तोड़फोड़ कर रहे हैं।


सालबोनी सीट पर असंतोष और विवाद

सालबोनी सीट पर केंद्रीय नेतृत्व ने अरूप मुखर्जी को उम्मीदवार के रूप में चुना है। हालांकि, स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इस चयन को लेकर गहरा असंतोष है। सोमवार को नाराज कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में जमकर हंगामा किया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए फर्नीचर को तोड़ डाला और अपनी आवाज उठाने के लिए कार्यालय में आग भी लगा दी।


सालबोनी सीट का महत्व

सालबोनी विधानसभा सीट झाड़ग्राम लोकसभा क्षेत्र में आती है, जहां लगभग 2 से 2.5 लाख मतदाता हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के श्रीकांत महाता ने करीब 32 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। भाजपा के राजीव कुंडू दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर थी।


पिछले चुनावों का इतिहास

यह सीट पिछले तीन विधानसभा चुनावों से तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण में है। पहले यह सीट वामपंथी दलों का गढ़ मानी जाती थी। अब कांग्रेस यहां अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन टिकट वितरण को लेकर चल रही अंदरूनी कलह पार्टी की चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर रही है।


कार्यकर्ताओं का आक्रोश

स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि टिकट वितरण में उनकी राय को नजरअंदाज किया गया है। केंद्रीय नेतृत्व के निर्णय के खिलाफ उन्होंने पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की। इस घटना ने कांग्रेस की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी नेतृत्व अब इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा है ताकि चुनावी अभियान पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।


सालबोनी सीट पर बवाल का असर

सालबोनी जैसी महत्वपूर्ण सीट पर यह बवाल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि पार्टी जल्दी इस असंतोष को दूर नहीं करती, तो आगामी चुनाव में इसका नुकसान हो सकता है।